पश्चिम बंगाल चुनाव: BJP ने सुवेंदु अधिकारी को दो सीटों पर उतारा, ममता बनर्जी की रणनीति पर सवाल
चुनाव की तैयारी में तेजी
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपने पहले उम्मीदवारों की सूची जारी की है, जिसमें 144 नाम शामिल हैं। राज्य में कुल 294 सीटें हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि पार्टी ने आधे से अधिक सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।
सुवेंदु अधिकारी की प्रमुख भूमिका
इस सूची में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी की चर्चा सबसे अधिक हो रही है। उन्हें भवानीपुर और नंदीग्राम जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर उतारा गया है। यह कदम मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सीधी चुनौती देने का संकेत है, क्योंकि 2021 के चुनाव में सुवेंदु ने ममता को नंदीग्राम से हराकर सबको चौंका दिया था।
BJP की रणनीति
BJP की इस सूची में सुवेंदु अधिकारी को दो सीटों पर लड़ाने का निर्णय यह दर्शाता है कि पार्टी ममता बनर्जी के खिलाफ एक उच्च-स्तरीय मुकाबला चाहती है। नंदीग्राम में सुवेंदु पहले से मजबूत स्थिति में हैं, जबकि भवानीपुर ममता का गढ़ माना जाता है। 2021 में नंदीग्राम हारने के बाद, ममता ने भवानीपुर से उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की थी।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि टीएमसी की सूची में ममता किस सीट से उतरेंगी। क्या वे सीधे सुवेंदु से मुकाबला करेंगी या कोई नई रणनीति अपनाएंगी? सभी की नजरें टीएमसी की सूची पर टिकी हैं। बीजेपी की यह चाल इसलिए चतुर मानी जा रही है क्योंकि तृणमूल कांग्रेस का प्रचार मुख्य रूप से ममता बनर्जी पर निर्भर होता है।
यदि ममता एक या दो सीटों पर फंस जाती हैं, तो पूरे राज्य में चुनावी सभाएं करना उनके लिए कठिन हो सकता है। उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी भी पार्टी के बड़े चेहरे हैं, लेकिन पार्टी की कमान ममता के हाथों में है। पिछले चुनाव में भी बीजेपी ने ऐसी ही रणनीति अपनाई थी, जिसका उन्हें लाभ मिला। 2016 में केवल 3 सीटें जीतने वाली बीजेपी 2021 में 77 सीटों तक पहुंच गई।
अन्य महत्वपूर्ण नाम
इस सूची में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष को खड़गपुर सदर से टिकट दिया गया है। इसके अलावा, अलीपुरद्वार से परितोष दास और सिलीगुड़ी से डॉक्टर शंकर घोष को भी मौका मिला है। दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी ने इस बार अपने पुराने कार्यकर्ताओं पर अधिक भरोसा जताया है, जबकि बाहरी चेहरों को कम स्थान दिया गया है।
हालांकि, महिलाओं की भागीदारी कम है। केवल 11 महिला उम्मीदवारों को चुना गया है। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि यह सूची राज्य की जमीनी हकीकत को ध्यान में रखकर बनाई गई है, ताकि स्थानीय मुद्दों पर मजबूत पकड़ बनी रहे।
ममता की सूची का इंतजार
यह चुनाव बंगाल की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। बीजेपी की पहली सूची से स्पष्ट है कि पार्टी आक्रामक मोड में है और ममता के गढ़ को तोड़ने की कोशिश कर रही है। टीएमसी की तरफ से अभी सूची नहीं आई है, लेकिन ममता के निर्णय पर सभी की उत्सुकता बनी हुई है।
