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पश्चिम बंगाल चुनाव: चुनाव आयोग ने अधिकारियों को हटाया, तृणमूल का विरोध

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद चुनाव आयोग ने प्रमुख अधिकारियों को हटाने का निर्णय लिया है, जिसे ममता बनर्जी की सरकार ने राजनीतिक साजिश बताया है। तृणमूल कांग्रेस ने इस कदम का विरोध करते हुए राज्यसभा से वॉकआउट किया। नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है, और चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे। जानें इस राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में और क्या कहा गया है।
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पश्चिम बंगाल चुनाव: चुनाव आयोग ने अधिकारियों को हटाया, तृणमूल का विरोध

चुनाव आयोग की कार्रवाई


पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद, चुनाव आयोग ने राज्य के प्रमुख अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की। मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, पुलिस महानिदेशक पीयूष पांडे, कोलकाता पुलिस आयुक्त सुप्रतिम सरकार और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को तुरंत हटा दिया गया।


चुनाव आयोग का निर्णय

चुनाव आयोग ने कहा कि यह निर्णय चुनावी तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया गया। दूसरी ओर, ममता बनर्जी की सरकार ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज शाम 4 बजे विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा से वॉकआउट भी किया। चुनाव 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होंगे, और परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।


नए अधिकारियों की नियुक्ति

हटाए गए अधिकारियों की जगह नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। दुष्यंत नरियाला को मुख्य सचिव बनाया गया है, जबकि सिद्ध नाथ गुप्ता नए पुलिस महानिदेशक होंगे। अजय कुमार नंद को कोलकाता पुलिस आयुक्त और संघमित्रा घोष को गृह एवं पहाड़ी मामलों की प्रधान सचिव नियुक्त किया गया है। आयोग ने निर्देश दिया है कि हटाए गए अधिकारी चुनाव समाप्त होने तक किसी भी चुनावी पद पर तैनात नहीं होंगे।


तृणमूल का विरोध

तृणमूल कांग्रेस ने आयोग के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है। सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि रात के समय मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस प्रमुख को हटाना अनुचित है। पार्टी ने राज्यसभा से पूरे दिन के लिए वॉकआउट किया। शताब्दी रॉय ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग कर रही है। ममता बनर्जी ने विरोध मार्च का ऐलान किया है।


चुनाव आयोग की सफाई

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि यह कदम राज्य की चुनावी तैयारियों की समीक्षा के बाद उठाया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बंगाल में चुनाव शांतिपूर्ण और हिंसा रहित होंगे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आयोग एक संवैधानिक संस्था है, और उसके निर्णयों पर सदन में सवाल उठाना उचित नहीं है।


राजनीतिक साजिश का आरोप

तृणमूल नेताओं का कहना है कि यह सब भाजपा की मिलीभगत से हो रहा है। भारत सरकार की इजरायल के साथ नजदीकी और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की कमजोरी भी बंगाल के लिए खतरा बन सकती है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि हटाए गए अधिकारी चुनाव ड्यूटी से दूर रहेंगे। राज्य में मतदान दो चरणों में होगा, और तृणमूल का कहना है कि जनता इसका जवाब देगी।