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पश्चिम बंगाल चुनाव: भाजपा का आत्मविश्वास और जमीनी हकीकत

पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों को लेकर भाजपा का आत्मविश्वास ऊंचा है, लेकिन क्या यह जमीनी हकीकत के अनुरूप है? भाजपा ने 152 में से एक सौ से अधिक सीटें जीतने का दावा किया है, जबकि ममता बनर्जी की पार्टी ने सभी मतदान केंद्रों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। क्या भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलेगा? जानिए इस लेख में भाजपा की चुनौतियों और मतदाता सुरक्षा पर उठते सवालों के बारे में।
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पश्चिम बंगाल चुनाव: भाजपा का आत्मविश्वास और जमीनी हकीकत

भाजपा का भरोसा और चुनावी माहौल

पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों को लेकर भाजपा का आत्मविश्वास काफी ऊंचा है। हालांकि, यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि भाजपा हर चुनाव में इसी तरह का भरोसा जताती है। लेकिन इस बार का माहौल कुछ अलग है। पहले चरण के मतदान से दो दिन पहले, यानी प्रचार बंद होने के दिन, भाजपा ने जो माहौल तैयार किया, वह अभी भी बना हुआ है। भाजपा ने 152 में से एक सौ से अधिक सीटें जीतने का दावा किया है। यह भी दिलचस्प है कि दिल्ली से आए पत्रकार भी एक ही बात कह रहे हैं। यहां तक कि कोलकाता में राइटविंग इको सिस्टम के लोग भी वही बातें दोहरा रहे हैं।


हिंदू एकता और भाजपा का दावा

इन सभी चर्चाओं का सार यह है कि पश्चिम बंगाल के हिंदू इस बार एकजुट हैं। वे मुसलमानों की बढ़ती जनसंख्या और उनकी गतिविधियों से चिंतित हैं। इसके अलावा, वे ममता बनर्जी की पार्टी की नीतियों से भी असंतुष्ट हैं। कट मनी और पाड़ा क्लब जैसी समस्याओं से लोग परेशान हैं। इसी आधार पर भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल करने का दावा किया है।


जमीनी हकीकत और भाजपा की चुनौतियाँ

हालांकि, यह सवाल उठता है कि क्या भाजपा के द्वारा बनाई गई धारणा के आधार पर इतना भरोसा किया जा सकता है कि पूर्ण बहुमत मिल जाएगा? असलियत यह है कि भाजपा केवल 70 प्रतिशत वोट में भाग ले रही है, जबकि ममता बनर्जी ने सभी 100 प्रतिशत वोट में भाग लिया है। इसके अलावा, भाजपा केवल 70 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर सक्रिय रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने सभी मतदान केंद्रों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।


भाजपा की पोलिंग एजेंट की कमी

भाजपा के कम मतदान केंद्रों पर लड़ने का मतलब है कि लगभग 30 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर उनकी उपस्थिति नहीं थी। उदाहरण के लिए, फालता विधानसभा सीट पर 284 बूथों में से लगभग 280 पर भाजपा का पोलिंग एजेंट नहीं था। यह स्थिति केवल दक्षिण 24 परगना के कुछ बूथों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र में यही हालात हैं। यहां तक कि शुभेंदु अधिकारी, जो भाजपा के सीएम पद के दावेदार हैं, जिन सीटों पर लड़े, वहां भी सभी मतदान केंद्रों पर भाजपा को पोलिंग एजेंट नहीं मिले।


मतदाता सुरक्षा पर सवाल

एक रिपोर्ट के अनुसार, ममता बनर्जी की भबानीपुर विधानसभा सीट पर 50 से अधिक मतदान केंद्रों पर भाजपा का पोलिंग एजेंट नहीं था। इसी तरह, शुभेंदु अधिकारी की नंदीग्राम सीट पर भी 80 से अधिक पोलिंग बूथ पर भाजपा को पोलिंग एजेंट नहीं मिले। यह स्थिति दोनों चरणों के मतदान में बनी रही। हालांकि, यह भी सच है कि जिन बूथों पर भाजपा का पोलिंग एजेंट नहीं था, वहां भी भाजपा को कुछ वोट मिले होंगे। लेकिन लगभग 30 प्रतिशत क्षेत्र भगवान भरोसे था।


भाजपा की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था

यदि हिंदुओं में इतना मजबूत सेंटिमेंट है कि वे हर हाल में भाजपा को वोट देंगे, तभी इन बूथों पर भाजपा को वोट मिले होंगे। अन्यथा, वहां का अधिकांश वोट तृणमूल कांग्रेस के खाते में जाएगा। इस प्रकार की रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार और चुनाव आयोग द्वारा की गई सुरक्षा व्यवस्था कितनी कमजोर है। सोचिए, जब पूरी केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, न्यायपालिका और केंद्रीय अर्धसैनिक बल मिलकर इतनी सुरक्षा नहीं सुनिश्चित कर सके कि भाजपा को पोलिंग एजेंट मिलें, तो मतदाताओं को सुरक्षा का भरोसा कैसे हो सकता है?