पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत, टीएमसी के दिग्गजों की हार
भाजपा ने टीएमसी के गढ़ों को ध्वस्त किया
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार पूर्ण बहुमत प्राप्त कर एक ऐतिहासिक जीत हासिल की है। इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई पुराने और मजबूत किलों को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी किए गए बूथ स्तर के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, टीएमसी के 36 प्रमुख नेताओं में से केवल 14 ही अपनी सीटें बचा सके, जबकि 22 नेताओं को करारी हार का सामना करना पड़ा।
ममता बनर्जी की हार के कारण
चुनाव परिणामों में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कई अन्य प्रमुख मंत्रियों को अपने ही क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा। 16 वरिष्ठ टीएमसी नेताओं ने अपनी सीटों के केवल एक-तिहाई या उससे भी कम पोलिंग बूथों पर जीत हासिल की।
भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी की जीत
भवानीपुर विधानसभा सीट पर, जहां ममता बनर्जी ने 2021 के उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की थी, भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें करारी शिकस्त दी। ममता केवल 62 पोलिंग बूथों पर ही बढ़त बना सकीं, जबकि शुभेंदु ने 197 बूथों पर 50 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर के साथ जीत दर्ज की।
टीएमसी के मंत्रियों की हार
ममता सरकार के चार प्रमुख मंत्रियों ने अपनी सीटों के कुल पोलिंग बूथों में से महज 15 प्रतिशत पर भी जीत नहीं हासिल की। इन मंत्रियों को भाजपा के उम्मीदवारों ने बड़े अंतर से हराया। केवल तीन मंत्री ऐसे रहे जिन्होंने अपनी सीटों पर 80 प्रतिशत से अधिक पोलिंग बूथों पर जीत दर्ज की।
भाजपा की रणनीति
चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि भाजपा ने टीएमसी के दिग्गजों को सत्ता से बेदखल करने के लिए एक रणनीतिक तरीके से जीत हासिल की। जिन 22 हाई-प्रोफाइल सीटों पर टीएमसी के नेता हारे, उनमें से 15 सीटों पर भाजपा ने 30 प्रतिशत से कम बूथों पर 50 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर प्राप्त किया।
हार और जीत का अंतर
जिन 22 सीटों पर टीएमसी के दिग्गज हार गए, उनमें से 16 सीटों पर भाजपा और टीएमसी के बीच 10 प्रतिशत से अधिक वोटों का अंतर देखा गया। वहीं, टीएमसी के 14 भाग्यशाली नेताओं में से कुछ ने ग्रामीण इलाकों के वोटों की बदौलत जीत हासिल की।
