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पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने बड़े चेहरों पर किया भरोसा

भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के चुनाव में प्रमुख नेताओं को उतारकर अपनी चुनावी रणनीति को मजबूत किया है। शुभेंदु अधिकारी, दिलीप घोष, और रूपा गांगुली जैसे बड़े चेहरों को मैदान में लाकर भाजपा को उम्मीद है कि इनकी लोकप्रियता आस-पास की सीटों पर भी असर डालेगी। इसके साथ ही, पार्टी ने पारिवारिक राजनीति के नियमों को भी नजरअंदाज किया है, जैसे कि अर्जुन सिंह और उनके बेटे पवन सिंह को एक साथ चुनावी मैदान में उतारना। जानें इस चुनावी रणनीति के पीछे की सोच और इसके संभावित परिणाम।
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पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने बड़े चेहरों पर किया भरोसा

भाजपा का चुनावी रणनीति

भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के आगामी चुनावों में प्रमुख नेताओं और चर्चित चेहरों को मैदान में उतारने का निर्णय लिया है। पार्टी ने अपने अधिकांश प्रमुख नेताओं को चुनावी दौड़ में शामिल किया है। शुभेंदु अधिकारी दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष भी चुनावी मैदान में हैं। इसके अलावा, पूर्व केंद्रीय मंत्री निशिथ प्रमाणिक और महाभारत सीरियल की प्रसिद्ध अभिनेत्री रूपा गांगुली को भी पार्टी ने टिकट दिया है। भाजपा को विश्वास है कि इन बड़े चेहरों की लोकप्रियता का प्रभाव आस-पास की सीटों पर भी पड़ेगा।


भाजपा ने टिकट वितरण में पारिवारिक राजनीति के नियमों को भी नजरअंदाज किया है। इसका एक उदाहरण पूर्व सांसद अर्जुन सिंह हैं, जिनका उत्तर 24 परगना क्षेत्र में अच्छा प्रभाव है। हालांकि, वे बैरकपुर सीट से चुनाव हार गए थे, लेकिन उनकी लोकप्रियता में कमी नहीं आई है। भाजपा ने उन्हें नोआपारा सीट से विधानसभा चुनाव में उतारा है, जबकि उनके बेटे पवन सिंह को भाटपारा सीट से टिकट दिया गया है। आमतौर पर भाजपा का मानना है कि पिता और पुत्र को एक साथ चुनाव में नहीं उतारा जाएगा, लेकिन पश्चिम बंगाल में यह नियम टूटता नजर आ रहा है।