पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर कार्रवाई: क्या है असली वजह?
कोलकाता में TMC पर कार्रवाई का बढ़ता दबाव
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ कार्रवाई तेज हो गई है। राज्य में टीएमसी के कई प्रमुख नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और स्थानीय पदाधिकारियों पर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा कठोर कदम उठाए जा रहे हैं। इन पर वित्तीय धोखाधड़ी, रंगदारी, जबरन वसूली, अवैध हथियारों का उपयोग, चुनावी हिंसा और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
ED और पुलिस की कार्रवाई में बड़े नाम शामिल
इस कार्रवाई में पूर्व मंत्री सुजीत बोस का नाम सबसे प्रमुख है, जिन्हें नगरपालिका भर्ती घोटाले में धन शोधन के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। संदेशखाली विवाद के मुख्य आरोपी, निलंबित TMC नेता शेख शाहजहां भी गिरफ्तार किए गए हैं। उन पर जमीन हड़पने, महिलाओं पर अत्याचार और ED अधिकारियों पर हमले के आरोप हैं।
स्थानीय स्तर पर भी गिरफ्तारी का सिलसिला
यह कार्रवाई केवल बड़े नेताओं तक सीमित नहीं है। दक्षिण 24 परगना के बिश्नुपुर से TMC विधायक दिलीप मंडल के बेटे अर्घ्य मंडल को STF ने गिरफ्तार किया, जिनके पास विदेशी पिस्तौल और कारतूस मिले हैं।
मालदा के रतुआ ब्लॉक की TMC पंचायत प्रधान स्मृतिकणा मंडल और उनके पति अनिल मंडल को 13 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में गिरफ्तार किया गया है। कूचबिहार में TMC ब्लॉक अध्यक्ष अब्दुल कादर हक को राजनीतिक हमलों और तोड़फोड़ के आरोप में पकड़ा गया है। फाल्टा पंचायत के उपाध्यक्ष सैदुल खान समेत कई अन्य नेताओं को रंगदारी और हमले के मामलों में हिरासत में लिया गया है।
फरार TMC नेता और जनता का गुस्सा
कई TMC नेता गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गए हैं। बिश्नुपुर के विधायक दिलीप मंडल और दिनहाटा के पूर्व विधायक उदयन गुहा की पुलिस तलाश कर रही है। इन गिरफ्तारियों के बाद बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों में TMC के खिलाफ जनता का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है।
कई स्थानों पर पुलिस थानों के बाहर प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग TMC नेताओं से पहले ली गई रंगदारी की रकम वापस करने की मांग कर रहे हैं।
विपक्ष, जो सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में है, इस कार्रवाई को 'जनता की जीत' बता रहा है, जबकि TMC इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' करार दे रही है। बंगाल में राजनीतिक सफाई का यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की संभावना है।
