Newzfatafatlogo

पश्चिम बंगाल में उपचुनाव के लिए बुर्के वाली महिलाओं की जांच का नया मॉडल

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने बुर्के वाली महिलाओं की मतदान जांच का नया मॉडल लागू किया है, जो उत्तर प्रदेश के रामपुर उपचुनाव से प्रेरित है। इस प्रक्रिया के तहत महिलाओं की जांच मतदान केंद्र के बाहर भी की जाएगी, जिससे उनकी पहचान और वोट डालने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। जानें इस नए नियम के पीछे के कारण और इससे प्रभावित होने वाली महिलाओं की संभावनाएं।
 | 
पश्चिम बंगाल में उपचुनाव के लिए बुर्के वाली महिलाओं की जांच का नया मॉडल

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग का नया निर्णय

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की पुलिस द्वारा रामपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान अपनाए गए मॉडल को अब चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में लागू करने का निर्णय लिया है। इस मॉडल के अनुसार, बुर्के में रहने वाली महिलाओं की जांच मतदान केंद्र के बाहर भी की जाएगी। इसका मतलब है कि उनकी जांच एक से अधिक बार हो सकती है। समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया था कि आजम खान के इस्तीफे के बाद खाली हुई रामपुर सीट पर उपचुनाव के दौरान पुलिस ने मतदान केंद्र से पहले ही बैरिकेड लगा दिए थे और बुर्के वाली महिलाओं की जांच भी वहीं की जा रही थी। इस प्रक्रिया के कारण कई लोग मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच सके।


मतदान प्रक्रिया के नियम

नियमों के अनुसार, बुर्के में रहने वाली महिलाओं को मतदान केंद्र के अंदर जाकर अपना चेहरा दिखाना होता है। वहीं, मतदाता सूची में उनकी फोटो से मिलान किया जाता है और वोट डालने के लिए उनकी उंगली पर स्याही लगाई जाती है। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने यह तय किया है कि अब उनकी जांच मतदान केंद्र के बाहर ही की जाएगी। इसका एक कारण यह है कि आयोग को लगता है कि मतदान केंद्र के अंदर राज्य सरकार के कर्मचारी मौजूद होंगे। भाजपा के लोग पहले से ही आरोप लगाते रहे हैं कि राज्य सरकार के कर्मचारियों की मिलीभगत होती है। मतदान केंद्र के बाहर केंद्रीय बलों की तैनाती की जाएगी, जिससे बोगस मतदाताओं को पकड़ने का खतरा बढ़ जाएगा। इसके अलावा, ऐसी जांच से बचने के लिए कई महिलाएं मतदान करने नहीं जाएंगी।