Newzfatafatlogo

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और कांग्रेस के बीच संबंधों में तनाव बढ़ता जा रहा है। ममता ने जून में विपक्षी गठबंधन की बैठक की घोषणा की है, जबकि कांग्रेस ने तृणमूल के खिलाफ अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। कांग्रेस अब शहीद दिवस पर अपना दावा पेश करने की योजना बना रही है, जो 21 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का इतिहास ममता के युवा कांग्रेस के दिनों से जुड़ा हुआ है। जानें इस राजनीतिक संघर्ष के पीछे की पूरी कहानी।
 | 
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल के बीच बढ़ती राजनीतिक खींचतान

ममता बनर्जी और कांग्रेस के बीच संबंधों में तनाव


ममता बनर्जी ने हाल ही में कहा है कि जून में विपक्षी दलों की एक बैठक आयोजित की जाएगी। उनकी पार्टी के नेता कांग्रेस के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस इस समय सहयोग के लिए तैयार नहीं है। जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। प्रदेश कांग्रेस के नेता तृणमूल के कई जिला और पंचायत कार्यालयों पर कांग्रेस का झंडा फहराने का कार्य कर रहे हैं, यह कहते हुए कि ये कार्यालय पहले कांग्रेस के थे, जिन्हें ममता बनर्जी ने अपने कब्जे में ले लिया।


कांग्रेस का शहीद दिवस पर दावा

इस बीच, ममता बनर्जी द्वारा हर साल आयोजित शहीद दिवस के कार्यक्रम पर भी कांग्रेस अपना दावा पेश करने की योजना बना रही है। उल्लेखनीय है कि 21 जुलाई 1993 को कोलकाता में एक प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस के 13 कार्यकर्ता पुलिस की गोलीबारी में मारे गए थे। उस समय ममता बनर्जी युवा कांग्रेस की नेता थीं और उनके नेतृत्व में कार्यकर्ता मतदाता सूची में मतदाताओं की तस्वीरें लगाने के लिए आंदोलन कर रहे थे। कांग्रेस का कहना है कि मारे गए कार्यकर्ता युवा कांग्रेस के थे, इसलिए उनकी शहादत पर कार्यक्रम का आयोजन भी कांग्रेस द्वारा किया जाएगा। ध्यान रहे कि 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस का गठन करने से पहले ममता बनर्जी इसी बैनर तले शहीद दिवस का आयोजन करती थीं। अब कांग्रेस इस पर अपना दावा कर रही है और बताया जा रहा है कि इस साल 21 जुलाई को कांग्रेस भी एक कार्यक्रम आयोजित करेगी।