पश्चिम बंगाल में कोयला तस्करी मामले में आई-पीएसी पर ईडी की छापेमारी: क्या है पूरा मामला?
ईडी की छापेमारी का नया दौर
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2 अप्रैल, गुरुवार को पश्चिम बंगाल में कोयला तस्करी और चोरी से जुड़े मामलों में अपनी कार्रवाई को तेज करते हुए राजनीतिक परामर्श कंपनी आई-पीएसी के कई स्थानों पर छापे मारे। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एजेंसी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है, जिसमें हैदराबाद, बेंगलुरु और दिल्ली जैसे विभिन्न शहरों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया।
आई-पीएसी के दफ्तरों की जांच
सूत्रों के अनुसार, आई-पीएसी से जुड़े कई दफ्तरों और परिसरों की एक साथ जांच की जा रही है। इस दौरान बेंगलुरु में ऋषि राज सिंह के निवास की भी तलाशी ली गई। एजेंसी को संदेह है कि कोयला तस्करी से प्राप्त अवैध धन के लेन-देन में कुछ संस्थाओं की संलिप्तता हो सकती है, जिसकी कड़ियां अब इस कंपनी तक पहुंच रही हैं।
आई-पीएसी की भूमिका
आई-पीएसी, पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को चुनावी रणनीति और राजनीतिक परामर्श सेवाएं प्रदान करती है। इसके अलावा, यह संगठन पार्टी के आईटी और मीडिया संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पिछली छापेमारी का संदर्भ
जनवरी में भी ईडी ने इसी मामले में आई-पीएसी के कोलकाता स्थित कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस समय यह कार्रवाई राजनीतिक विवाद का कारण बनी थी। तलाशी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कई पार्टी नेताओं के साथ साल्ट लेक स्थित दफ्तर पहुंच गई थीं।
जांच में बाधा का आरोप
ईडी ने आरोप लगाया था कि उस दौरान परिसर से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हटा दिए गए, जिससे जांच प्रभावित हो सकती थी। हालांकि, ममता बनर्जी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय एजेंसी पर अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करने का आरोप लगाया।
निष्पक्ष जांच की मांग
इसके बाद, ईडी ने राज्य सरकार के कथित हस्तक्षेप का हवाला देते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की। एजेंसी ने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से स्वतंत्र जांच कराने के लिए उच्च न्यायालय और फिर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
घोटाले से जुड़े आरोप
जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि इस कथित घोटाले से जुड़े लगभग 10 करोड़ रुपये हवाला नेटवर्क के जरिए आई-पीएसी तक पहुंचाए गए। इसके साथ ही यह आरोप भी सामने आया है कि कंपनी को 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव के दौरान अपनी सेवाओं के बदले अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस से भुगतान मिला था। फिलहाल, ईडी इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है।
