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पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति का जटिल परिदृश्य

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ईडी की छापेमारी ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच प्रतिस्पर्धा को और बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है। जानें इस जटिल राजनीतिक परिदृश्य के बारे में अधिक जानकारी।
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पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति का जटिल परिदृश्य

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति


राजीव रंजन तिवारी | 'कोस कोस पर बानी बदले, तीन कोस पर पानी' एक प्रसिद्ध हिंदी कहावत है, जो भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है। इसका अर्थ है कि हर कुछ किलोमीटर पर पानी का स्वाद और भोजन में बदलाव होता है। इसी तरह, पश्चिम बंगाल की माटी की महक और मिजाज का एक अलग मनोविज्ञान है। यहां विधानसभा चुनावों की तैयारी चल रही है, जिसमें सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। खासकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच की प्रतिस्पर्धा काफी तीव्र हो गई है। हाल ही में ईडी की छापेमारी ने राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है।


पश्चिम बंगाल में चुनावी राजनीति का जटिल परिदृश्य
राजीव रंजन तिवारी, संपादक।


पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों से पहले केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव अपने चरम पर पहुंच गया है। 8 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति संभालने वाली कंपनी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपैक) के प्रमुख प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया और महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। यह घटनाक्रम कथित कोयला घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।


ईडी ने कहा कि छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी ने जांच में बाधा डाली। उन्होंने महत्वपूर्ण सबूतों को अपने कब्जे में ले लिया। ममता ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह तरीका ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईडी उनकी पार्टी के दस्तावेज चुराने आई थी।


ममता ने चुनौती दी कि अगर अमित शाह इसी तरह चलते रहे, तो भाजपा को बंगाल में कोई सीट नहीं मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि एक ऐप के जरिए बंगाल के 58 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश की जा रही है। इस बीच, प्रतीक जैन के परिवार ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।


विपक्ष ने भी इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री ने खुद को संविधान से ऊपर रखा है। माकपा और कांग्रेस ने इसे नूराकुश्ती करार दिया है।


आईपैक, जो ममता बनर्जी के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक उपकरण है, ने 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद से तृणमूल के लिए रणनीतियों का निर्माण किया है। अब, ममता बनर्जी के लिए यह आवश्यक है कि वह आगामी विधानसभा चुनावों में एक मजबूत नैरेटिव सेट करें।


पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति लगातार बदल रही है। चुनावों में किसकी जीत होगी, यह अभी कहना मुश्किल है। लेकिन राजनीतिक हलचल को समझना आवश्यक है।