पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भीतर विद्रोह की लहर, ममता बनर्जी की बैठक हुई असफल
कोलकाता में टीएमसी की आपात बैठक
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में सत्ता खोने के बाद तृणमूल कांग्रेस के अंदर का विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कालीघाट स्थित आवास पर आयोजित की गई पार्टी के प्रमुख नेताओं की आपात बैठक पूरी तरह से विफल रही। इस महत्वपूर्ण बैठक में पार्टी के अधिकांश निर्वाचित प्रतिनिधियों ने भाग नहीं लिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह की लहर अब बेकाबू हो चुकी है।
विधायकों की बगावत
सूत्रों के अनुसार, विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद टीएमसी के 80 विधायकों में से दो-तिहाई से अधिक नेता खुलकर बगावत पर उतर आए हैं। इससे पहले, 60 विधायकों ने एक महत्वपूर्ण बैठक का सामूहिक बहिष्कार किया था। शुक्रवार की समीक्षा बैठक में स्थिति और भी बिगड़ गई, जब ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के सामने केवल आठ वफादार विधायक ही उपस्थित हुए, जिसने शीर्ष नेतृत्व को चौंका दिया।
सांसदों की अनुपस्थिति
लोकसभा और राज्यसभा सांसदों ने भी बनाई दूरी
इस बैठक में केवल विधायकों ने ही नहीं, बल्कि पार्टी के सांसदों ने भी ममता बनर्जी को बड़ा झटका दिया। लोकसभा के 28 सांसदों में से केवल 4 सदस्य ही कालीघाट पहुंचे। वहीं, राज्यसभा में 13 सांसदों में से 11 ने बैठक से पूरी तरह किनारा कर लिया। उच्च सदन से केवल डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन ही शीर्ष नेतृत्व के साथ खड़े दिखाई दिए, जबकि अन्य सांसदों की अनुपस्थिति ने बड़े दलबदल के संकेत दिए।
संगठनात्मक बदलावों की कोशिश
संगठनात्मक बदलावों के जरिए नियंत्रण की कोशिश
बगावत के इस नाजुक दौर में तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी संगठन में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों की घोषणा की है। अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव के पद पर बनाए रखते हुए उनकी सहायता के लिए दो नए संयुक्त सचिव नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा, चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल प्रदेश तृणमूल कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि पुराने वफादार सुब्रत बख्शी को राष्ट्रीय कार्यसमिति में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नए चेहरों की नियुक्ति
युवा और विंग्स की कमान नए चेहरों को
पार्टी को बिखरने से बचाने के लिए ममता बनर्जी ने विभिन्न मोर्चों पर नए अध्यक्षों की घोषणा की है। इसके तहत सायोनी घोष को टीएमवाईसी (युवा विंग) की कमान सौंपी गई है, जबकि माला रॉय को महिला विंग और मोलॉय घटक को आईएनटीटीयूसी की जिम्मेदारी मिली है। प्रवक्ता पैनल में कुणाल घोष और कल्याण बनर्जी को बनाए रखा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी अनुपस्थिति के बीच किए गए ये संगठनात्मक बदलाव पार्टी के आंतरिक कलह को दबाने में पूरी तरह से असफल साबित हो रहे हैं।
