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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उठे विवाद के बाद राजनीतिक हलचल

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी अब खुलकर सामने आ गई है। विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद, विधायकों के जाली हस्ताक्षरों का मामला सामने आया है, जिससे पार्टी की छवि को गंभीर नुकसान हुआ है। इस विवाद ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है, और सीआईडी ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया है। जानें इस मामले में क्या हो रहा है और पार्टी के भीतर असंतोष के कारण क्या हैं।
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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर उठे विवाद के बाद राजनीतिक हलचल

कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस की अंदरूनी कलह


कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर की गुटबाजी अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी में चल रही अंतर्विरोध उस समय एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गई, जब विपक्ष के नेता के नामांकन पत्र में विधायकों के जाली हस्ताक्षर का मामला सामने आया। इस कथित 'सिग्नेचर घोटाले' ने तृणमूल नेतृत्व की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है, जिससे पार्टी अब रक्षात्मक स्थिति में आ गई है।


यह विवाद तब शुरू हुआ जब शोभनदेब चटर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाने के लिए एक समर्थन पत्र तैयार किया गया। इसके लिए पार्टी को कम से कम 70 विधायकों के हस्ताक्षरों की आवश्यकता थी। जैसे ही यह सूची जारी हुई, कई विधायकों ने बगावती रुख अपनाते हुए कहा कि उन्होंने इस पत्र पर कभी हस्ताक्षर नहीं किए थे। चुनाव परिणामों के बाद हुई बैठक में यह जिम्मेदारी ममता बनर्जी को सौंपी गई थी।


नेतृत्व पर उठे सवाल

अपनों ने ही उठाए नेतृत्व पर सवाल


पार्टी के भीतर असंतोष तब और बढ़ गया जब रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा जैसे विधायकों ने सीधे शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाए। निष्कासित नेता संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस गलत सूची को प्रमाणित किया था, इसलिए इस लापरवाही की जिम्मेदारी उनकी बनती है। विधायक बहारुल इस्लाम ने भी स्वीकार किया कि बैठक में गैरहाजिर रहने के बावजूद उनकी नाम सूची में था।


जांच के लिए विशेष टीम का गठन

सीआईडी की विशेष एसआईटी गठित


मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल आपराधिक जांच विभाग (CID) ने इस कथित जालसाजी की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। एक पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) के नेतृत्व में यह टीम विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रही है। सीआईडी की टीमें अब संबंधित विधायकों के घर जाकर हैंडराइटिंग विशेषज्ञों की मदद से उनके असली हस्ताक्षरों का मिलान कर रही हैं।


पार्टी की कार्रवाई

बागी नेताओं पर पार्टी की गाज


इस अंदरूनी कलह को दबाने के लिए तृणमूल कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाते हुए रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया है। पार्टी उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य ने एक बयान में कहा कि ये विधायक लगातार बैठकों से अनुपस्थित रहकर अनुशासनहीनता कर रहे थे। दूसरी ओर, सीआईडी ने पूछताछ के लिए अभिषेक बनर्जी को समन भेजा था, लेकिन वे जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए।


राजनीतिक वार-पलटवार

भाजपा और ममता में वार-पलटवार


इस विवाद ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह से गरमा दिया है। विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी पर अपने ही विधायकों के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। इस पर पलटवार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से तृणमूल की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विधायकों को डराकर बैठकों में आने से रोका जा रहा है।