पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से 27 लाख नाम हटाने पर विवाद
मतदाता सूची में कटौती का मामला
चुनाव आयोग ने तार्किक विसंगति के आधार पर पश्चिम बंगाल में 27 लाख 10 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए हैं। इन मतदाताओं की आपत्तियों की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 19 न्यायाधिकरण स्थापित किए गए हैं, जो कोलकाता के डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर एंड सैनिटेशन में कार्यरत हैं। इस संस्थान के बाहर सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी है कि इसकी तुलना अमेरिका के फोर्ट नॉक्स से की जा सकती है, जहां सोने का भंडार रखा जाता है।
सुरक्षा और सुनवाई की प्रक्रिया
इंस्टीट्यूट के बाहर कई स्तर की सुरक्षा तैनात की गई है, जिसमें पुलिस और बैरिकेडिंग शामिल हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, 21 अप्रैल को जब पहले चरण के मतदान के लिए प्रचार समाप्त होना था, न्यायाधिकरण के जज सुबह साढ़े 10 बजे संस्थान के अंदर गए और उसके बाद किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
आपत्तियों पर सुनवाई का संकट
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कई लोग, जैसे राम प्रसाद बिस्वास और रूपा सेन, अपने दस्तावेज लेकर न्यायाधिकरण के सामने पहुंचे, लेकिन उन्हें कोई उत्तर नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 21 अप्रैल तक जिनके नाम न्यायाधिकरण से मंजूर होंगे, उन्हें मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
मतदाता सूची में नामों की कटौती
चुनाव आयोग ने 60 लाख से अधिक नाम तार्किक विसंगति के आधार पर काट दिए थे। 16 मार्च को जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा की गई, तब मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि राज्य में केवल 6 करोड़ 44 लाख मतदाता हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप नहीं किया होता, तो आयोग 60 लाख लोगों को मताधिकार से वंचित कर देता।
संसाधनों की कमी और तकनीकी समस्याएं
न्यायिक अधिकारियों की जांच के बाद 33 लाख नामों को मंजूरी दी गई। सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग को संसाधनों की कमी के आधार पर इतनी बड़ी संख्या में नाम काटने की अनुमति दी जा सकती है? इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने शेष 27 लाख लोगों के दस्तावेजों की जांच के लिए भी न्यायाधिकरण का गठन किया।
टाइपिंग की गलतियों का मुद्दा
चुनाव आयोग ने तार्किक विसंगति के नाम पर कई टाइपिंग की गलतियों को भी शामिल किया। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति की उम्र और उसके पिता की उम्र में 15 साल से कम का अंतर है, तो इसे तार्किक विसंगति माना जाता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग
चुनाव आयोग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके तार्किक विसंगतियों की पहचान की। यदि किसी व्यक्ति के छह या उससे अधिक बच्चे हैं, तो उसे नोटिस भेजा गया। यह प्रक्रिया कई परिवारों के लिए समस्याएं उत्पन्न कर रही है।
उपसंहार
कुल मिलाकर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची की सफाई के नाम पर नामों की कटौती का अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोग वोट डालने से वंचित रह गए। इससे चुनाव के बाद नई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
