पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति दौरे पर ममता बनर्जी का विवाद: क्या है असली कहानी?
राष्ट्रपति के दौरे पर उठे सवाल
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हालिया दौरे के दौरान प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। इस मामले में ममता बनर्जी की सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति का कारण स्पष्ट किया गया है। यह रिपोर्ट राज्य के मुख्य सचिव द्वारा केंद्रीय गृह सचिव को भेजी गई है।
राष्ट्रपति की नाराजगी
7 मार्च को राष्ट्रपति ने उत्तर बंगाल में इंटरनेशनल संथाल सम्मेलन में भाग लिया। यह कार्यक्रम सिलिगुड़ी के निकट गोसाईंपुर में आयोजित हुआ। राष्ट्रपति ने कम लोगों की उपस्थिति, स्थान परिवर्तन और प्रोटोकॉल की कमी पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उनकी छोटी बहन के समान हैं, लेकिन यह समझ नहीं आ रहा कि वे क्यों नाराज हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य सरकार की आलोचना की और 'ब्लू बुक' नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया।
ममता बनर्जी का स्पष्टीकरण
राज्य सरकार ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम निजी संगठन इंटरनेशनल संथाल काउंसिल द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें राज्य सरकार की कोई भागीदारी नहीं थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को आधिकारिक निमंत्रण नहीं मिला था, और राष्ट्रपति सचिवालय की स्वीकृत सूची में उनका नाम भी नहीं था।
इसलिए, वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सकीं। स्थान परिवर्तन का निर्णय आयोजकों और प्रशासन के बीच चर्चा के बाद लिया गया, क्योंकि मूल स्थान पर व्यवस्थाएं ठीक नहीं थीं। राज्य ने यह भी कहा कि जिला प्रशासन ने कोई प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं किया।
रिपोर्ट में क्या कहा गया?
मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने रविवार को यह रिपोर्ट भेजी, जिसमें घटनाओं का क्रम, दस्तावेज और स्थान परिवर्तन के कारणों का उल्लेख किया गया है। राज्य के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि रिपोर्ट में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति का स्पष्ट कारण दिया गया है और 'ब्लू बुक' नियमों का पालन होने का दावा किया गया है।
राजनीतिक बयानबाजी का दौर
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा राष्ट्रपति के पद का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि कोई प्रोटोकॉल नहीं तोड़ा गया है। केंद्र ने रिपोर्ट मांगी थी, जो अब प्रस्तुत की जा चुकी है। यह विवाद बंगाल में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक तनाव को बढ़ा रहा है, और लोग देख रहे हैं कि आगे क्या होता है।
