पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तैयारी में टीएमसी और भाजपा की सक्रियता
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर टीएमसी और भाजपा ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। राज्य सरकार 1 से 4 सितंबर तक विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने जा रही है, जिसमें भाजपा शासित राज्यों में बंगालियों पर हो रहे कथित अत्याचारों का मुद्दा उठाया जा सकता है। इस विशेष सत्र के दौरान एसआईआर प्रक्रिया पर भी चर्चा होने की संभावना है। जानें इस राजनीतिक हलचल के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
Aug 30, 2025, 13:38 IST
| पश्चिम बंगाल में चुनावी हलचल
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है। राज्य सरकार 1 से 4 सितंबर तक विधानसभा का विशेष सत्र आयोजित करने जा रही है। इस सत्र में भाजपा शासित राज्यों में बंगालियों पर हो रहे कथित अत्याचारों का मुद्दा उठाया जा सकता है। इसके अलावा, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर भी विधानसभा में प्रस्ताव लाने की संभावना है।चुनाव आयोग द्वारा बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के चलते विपक्षी दलों ने इसका विरोध बढ़ा दिया है। पश्चिम बंगाल में तीन दिन तक चलने वाला यह विशेष सत्र राजनीतिक माहौल को और गर्म कर सकता है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले भी राजस्थान और ओडिशा जैसे राज्यों में बंगालियों के खिलाफ हो रहे अन्याय पर भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने श्रमिकों के लिए ‘श्रमश्री योजना’ लागू की है, जिसके तहत उन्हें हर महीने केवल 5 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, टीएमसी विधानसभा में एसआईआर का कड़ा विरोध करने की योजना बना रही है, क्योंकि यह माना जा रहा है कि चुनाव आयोग बंगाल में भी इसी तरह का पुनरीक्षण करवा सकता है। दूसरी ओर, बिहार में राहुल गांधी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाल रहे हैं, जिसमें टीएमसी के नेता यूसुफ पठान और ललितेश त्रिपाठी भी शामिल होंगे, जिससे दोनों दलों के बीच सहयोग भी नजर आ रहा है।
कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही राष्ट्रीय स्तर पर ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के सदस्य हैं। हाल ही में सीवान में आयोजित जनसभा में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि वे भाजपा की मदद से वोट चोरी में शामिल हैं, जिससे भाजपा के शीर्ष नेता चिंतित हैं।
विपक्षी दलों का मानना है कि एसआईआर अभियान के कारण मतदाता सूची से लगभग 65 लाख लोगों के नाम हटाने का प्रयास उनके मतदान अधिकार पर हमला है। इस यात्रा के माध्यम से कांग्रेस बिहार में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाना चाहती है ताकि लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित किए जाने का पर्दाफाश हो सके। पश्चिम बंगाल और बिहार दोनों राज्यों में चुनावी प्रक्रिया गहन राजनीति के बीच आगे बढ़ रही है, जहां मतदाता सूची और जातीय-सांस्कृतिक मुद्दे सियासी बहस का केंद्र बने हुए हैं। आगामी समय में विशेष सत्र और यात्रा के प्रभाव से राजनीतिक परिदृश्य में नए मायने जुड़ने की संभावना है।