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पांच राज्यों के चुनावों में मुस्लिम विधायकों का बढ़ता प्रभाव

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में मुस्लिम विधायकों की संख्या में वृद्धि एक महत्वपूर्ण ट्रेंड बनकर उभरी है। यह ट्रेंड कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों पर केंद्रित है, जो भविष्य की राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकता है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 80 विधायकों में से 33 मुस्लिम हैं, जबकि असम में कांग्रेस ने 19 सीटों में से 18 पर मुस्लिम उम्मीदवारों को जीत दिलाई है। इस लेख में इन चुनावों के परिणामों और उनके राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा की गई है।
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पांच राज्यों के चुनावों में मुस्लिम विधायकों का बढ़ता प्रभाव

चुनावों में मुस्लिम विधायकों की भूमिका

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आ रहा है, जो सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह ट्रेंड कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों से संबंधित है। इससे भविष्य की राजनीति की दिशा भी स्पष्ट होती दिख रही है। 20 प्रतिशत या उससे अधिक मुस्लिम जनसंख्या वाले राज्यों में संभावित घटनाक्रम का संकेत मिल रहा है। परिसीमन के बाद यह ट्रेंड स्थायी हो सकता है। स्पष्ट है कि इन राज्यों में भाजपा विरोधी दलों के पास केवल मुस्लिम विधायक रह जाएंगे। यह स्वाभाविक रूप से होगा, लेकिन भाजपा इसे इस तरह पेश करेगी कि ये पार्टियां केवल मुसलमानों को टिकट देती हैं, जबकि यह सच का केवल एक हिस्सा होगा। लेकिन राजनीति में सच की किसे परवाह है!


पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने 80 विधायकों को जीत दिलाई, जिनमें से 33 मुस्लिम हैं। गौर करें, ममता ने 294 सदस्यों की विधानसभा में 47 मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारा था, जो पिछले चुनावों की तुलना में सात कम हैं। इनमें से 33 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। ममता के कुल विधायकों में 42.5 प्रतिशत मुस्लिम हैं। इसे इस तरह प्रचारित किया जा रहा है कि ममता के आधे विधायक मुसलमान हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के दो विधायक जीते हैं, और दोनों मुस्लिम हैं। लेफ्ट का एक विधायक भी मुस्लिम है।


असम में कांग्रेस के विधायकों की चर्चा भी हो रही है। वहां कांग्रेस ने 19 सीटों पर जीत हासिल की, जिनमें से 18 मुस्लिम हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि असम में परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की भौगोलिक संरचना इस तरह बनाई गई कि कुछ क्षेत्रों में मुस्लिम जनसंख्या अधिक हो गई। पहले असम में लगभग 40 सीटें थीं, जहां मुस्लिम निर्णायक भूमिका में थे, लेकिन अब ऐसी सीटों की संख्या घटकर 20 के करीब रह गई है। इन सीटों पर अब कोई न कोई मुस्लिम ही जीतने की संभावना है, इसलिए भाजपा इन पर ध्यान नहीं देती।