Newzfatafatlogo

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव: अमेरिका की भूमिका पर नजर

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने क्षेत्रीय कूटनीति को प्रभावित किया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है। दोनों देशों के बीच हवाई हमले और जवाबी कार्रवाई के बीच तालिबान ने संवाद की इच्छा जताई है। इस संघर्ष का सामरिक महत्व गहरा है, और वैश्विक शक्तियों की प्रतिक्रियाएं इसे द्विपक्षीय मामले से आगे बढ़ा रही हैं। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और अधिक।
 | 
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव: अमेरिका की भूमिका पर नजर

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का नया चरण

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच 2600 किलोमीटर लंबी सीमा पर तनाव अब खुली सैन्य झड़पों में बदल चुका है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हवाई हमले, ड्रोन हमले और सीमा चौकियों पर हमलों का आरोप लगाया है। इस गंभीर स्थिति के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान की प्रशंसा करते हुए उसके आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीति में एक नया मोड़ आया है।


पाकिस्तान के हवाई हमले और अफगानिस्तान की प्रतिक्रिया

तनाव की शुरुआत तब हुई जब पाकिस्तान ने ऑपरेशन गजब लिल हक के तहत काबुल, कंधार और पक्तिया में हवाई और मिसाइल हमले किए। पाकिस्तान का दावा है कि इन हमलों में 274 तालिबान लड़ाके मारे गए। दूसरी ओर, अफगानिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा किया, जबकि पाकिस्तान ने अपने 12 सैनिकों की मौत की पुष्टि की है। मीडिया रिपोर्टों में काबुल में हमलों के बाद काले धुएं के उठने की तस्वीरें सामने आई हैं, और नागरिकों के हताहत होने की भी खबरें आई हैं।


तालिबान की वार्ता की इच्छा

अफगानिस्तान में तालिबान नेतृत्व ने हमलों के कुछ घंटों बाद संवाद की इच्छा व्यक्त की। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि इस्लामिक अमीरात हमेशा बातचीत के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने की कोशिश करता रहा है और अब भी वह वार्ता के लिए तैयार है।


अमेरिका की भूमिका और ट्रंप का समर्थन

इस घटनाक्रम में अमेरिका की भूमिका महत्वपूर्ण है। अमेरिकी उप विदेश मंत्री एलिसन हुकर ने पाकिस्तान की विदेश सचिव आमना बलूच से बातचीत के बाद कहा कि अमेरिका स्थिति पर नजर रखे हुए है और तालिबान के हमलों के खिलाफ आत्मरक्षा करने के पाकिस्तान के अधिकार का समर्थन करता है। ट्रंप ने पाकिस्तान के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनके संबंध बहुत अच्छे हैं और वहां एक महान प्रधानमंत्री और जनरल हैं।


कूटनीतिक दृष्टिकोण और क्षेत्रीय प्रभाव

ट्रंप के बयानों को पाकिस्तान के पक्ष में झुकाव के रूप में देखा जा रहा है। पहले अमेरिका तालिबान के साथ समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता की बात करता था, लेकिन अब वह पाकिस्तान के आत्मरक्षा अधिकार का समर्थन कर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि वाशिंगटन इस संघर्ष में इस्लामाबाद के साथ खड़ा है। इससे अफगान तालिबान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ सकता है और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पाकिस्तान के पक्ष में झुक सकता है।


संघर्ष का सामरिक महत्व

इस टकराव का सामरिक महत्व गहरा है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा क्षेत्र पहले से ही उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों का केंद्र रहा है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो इससे पूरे दक्षिण एशिया और मध्य एशिया में अस्थिरता फैल सकती है। रूस ने सशस्त्र झड़पों में वृद्धि पर चिंता जताते हुए दोनों देशों से वार्ता की अपील की है।


वैश्विक प्रतिक्रियाएं

यूरोपीय संघ ने अफगान क्षेत्र का उपयोग दूसरे देशों पर हमले के लिए न होने देने की बात दोहराई है। ब्रिटेन ने तनाव कम करने का आग्रह किया है, चीन ने युद्ध विराम की अपील की है और ईरान ने मध्यस्थता की पेशकश की है। यह संघर्ष अब केवल द्विपक्षीय मामला नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक शक्तियां भी इसकी दिशा पर नजर रखे हुए हैं।


पाकिस्तान का सैन्य लक्ष्य

सामरिक दृष्टि से, पाकिस्तान का काबुल और कंधार जैसे शहरों को निशाना बनाना महत्वपूर्ण संकेत है। यह पहली बार है जब उसने सीधे अफगान शासन संरचना को लक्ष्य बनाया है। वहीं, अफगानिस्तान की जवाबी ड्रोन कार्रवाई यह दिखाती है कि वह भी सैन्य स्तर पर जवाब देने में सक्षम है।


संघर्ष की संवेदनशीलता

ट्रंप के बयानों ने इस संकट को और संवेदनशील बना दिया है। यदि अमेरिका खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़ा रहता है, तो यह तालिबान को और अलग थलग कर सकता है। दूसरी ओर, इससे क्षेत्रीय ध्रुवीकरण बढ़ सकता है और संघर्ष के और व्यापक होने का खतरा भी पैदा हो सकता है। फिलहाल स्थिति बेहद नाजुक है और संवाद ही एकमात्र रास्ता नजर आता है, लेकिन जमीनी हालात बताते हैं कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई काफी गहरी हो चुकी है।