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पाकिस्तान की नई रॉकेट फोर्स कमांड की स्थापना और भारत की प्रतिक्रिया

पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में मिली हार के बाद एक नई रॉकेट फोर्स कमांड की स्थापना की प्रक्रिया शुरू की है। इस कदम का उद्देश्य लंबी दूरी की मारक क्षमता को बढ़ाना है। वहीं, भारत भी अपनी रॉकेट क्षमताओं को मजबूत करने की योजना बना रहा है। जानें इस सैन्य विकास के पीछे की रणनीतियाँ और दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बारे में।
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पाकिस्तान की नई रॉकेट फोर्स कमांड की स्थापना और भारत की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान की नई रॉकेट फोर्स कमांड

पाकिस्तानी सेना ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर में मिली हार के बाद अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए एक नई रॉकेट फोर्स कमांड स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, असीम मुनीर के नेतृत्व में आयोजित कोर कमांडर्स सम्मेलन ने पिछले महीने इस नई फोर्स की संरचना को मंजूरी दी थी, और इसके जल्द ही औपचारिक गठन की उम्मीद है। पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व ने दिसंबर में रॉकेट फोर्स कमांड पर चर्चा की थी और इसे एक उच्च तकनीक से लैस बल के रूप में पेश किया था। ऑपरेशन सिंदूर और अन्य संघर्षों ने यह स्पष्ट किया है कि लंबी दूरी के हथियारों की आवश्यकता बढ़ रही है। इस ऑपरेशन में आमने-सामने की लड़ाई नहीं हुई, बल्कि लंबी दूरी के हथियारों का उपयोग किया गया था।


भारत की प्रतिक्रिया

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। इसके जवाब में, पाकिस्तान ने अपने तथाकथित 'ऑपरेशन बुनियान-उन-मारसूस' के तहत ड्रोन, लोइटरिंग मुनिशन्स, लड़ाकू विमानों और मिसाइलों का प्रक्षेपण किया। हालांकि, भारत की सतर्क सेनाओं और मजबूत वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश पाकिस्तानी हमलों को विफल कर दिया। भारत ने चार दिनों तक चले संघर्ष में पाकिस्तान के वायु सेना के ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए और कई लड़ाकू विमानों को नष्ट किया।


क्या भारत भी रॉकेट फोर्स बनाने की योजना बना रहा है?

इस बीच, खुफिया सूत्रों ने बताया है कि भारत भी एक अलग रॉकेट फोर्स स्थापित करने पर विचार कर रहा है, हालांकि इसे अभी तक औपचारिक रूप नहीं दिया गया है। वर्तमान में, भारत की सामरिक बल कमान परमाणु हथियारों को नियंत्रित करती है, जबकि अन्य सैन्य बल पारंपरिक हथियारों का प्रबंधन करते हैं। हाल के युद्धों और संघर्षों के अनुभवों के बीच, लंबी दूरी की क्षमताओं पर केंद्रित एक नए बल के गठन की आवश्यकता महसूस की गई है, जहां लंबी दूरी की मिसाइलों और रॉकेटों ने युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।