पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश: अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की संभावना
मध्य-पूर्व में युद्ध समाप्त करने के प्रयास
मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में तेजी आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की एक सोशल मीडिया पोस्ट को साझा कर यह संकेत दिया है कि पाकिस्तान को अमेरिका और ईरान के बीच संभावित मध्यस्थ के रूप में देखा जा रहा है। शरीफ़ ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि यदि दोनों पक्ष सहमत होते हैं, तो पाकिस्तान "सार्थक और निर्णायक बातचीत" की मेज़बानी के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान मध्य-पूर्व में युद्ध समाप्त करने के प्रयासों का समर्थन करता है। यदि अमेरिका और ईरान सहमत होते हैं, तो हम इस संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत की मेज़बानी करना सम्मान की बात मानेंगे।"
पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका
शरीफ़ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान मध्य-पूर्व में शांति और स्थिरता के लिए बातचीत के प्रयासों का स्वागत करता है। उनकी पेशकश एक ऐसा मंच प्रदान करती है, जहाँ वॉशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं। पाकिस्तान की भूमिका एक बैकचैनल मध्यस्थ के रूप में उन स्थानों पर दूरियों को कम करने में मदद कर सकती है, जहाँ सीधी बातचीत संभव नहीं है।
अफगानिस्तान के साथ संघर्ष
हालांकि, पाकिस्तान खुद अफगानिस्तान के साथ युद्ध की स्थिति में है। यह संघर्ष तब बढ़ा जब इस्लामाबाद ने काबुल में हवाई हमले किए, जिन्हें उसने 'आतंकी ठिकाने' बताया। यह दोनों देशों के बीच कई वर्षों में सबसे गंभीर टकराव था। इस संघर्ष पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान कम है, क्योंकि दुनिया का ध्यान ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव पर केंद्रित है।
ईरान ने ट्रंप की पेशकश को ठुकराया
इस बीच, ट्रंप की घोषणा उस समय आई है जब दुनिया भर में इस संघर्ष के आर्थिक दुष्परिणामों को लेकर चिंता बढ़ रही है। खासकर, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में रुकावटों को लेकर चिंता अधिक है। ट्रंप ने यह दावा किया कि उन्होंने ईरान के साथ "सार्थक बातचीत" की है, लेकिन ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
बैक चैनल कूटनीति
अमेरिका और इज़राइल की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं। वे इस संघर्ष से बाहर निकलने का रास्ता खोजने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि इस्लामाबाद को बातचीत के लिए संभावित स्थल के रूप में चुना जा सकता है।
ईरान का कड़ा रुख
ईरान के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार ने कहा कि युद्ध तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान को मुआवज़ा और प्रतिबंधों से राहत नहीं मिल जाती। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के हस्तक्षेप के खिलाफ गारंटी की आवश्यकता है।
