पाकिस्तान की मध्यस्थता पर उठे सवाल, ईरानी विमानों को दी गई पनाह
पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल
तेहरान/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का कार्य कर रहे पाकिस्तान के बारे में नए सवाल उठने लगे हैं। एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने ईरानी लड़ाकू विमानों को अपने एयरफील्ड पर सुरक्षित रखने की अनुमति दी थी, ताकि वे संभावित अमेरिकी हवाई हमलों से बच सकें।
CBS News ने सोमवार को अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने कुछ विमानों को पाकिस्तान के नूर खान एयर बेस पर भेजा था। यह घटना उस समय हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अप्रैल की शुरुआत में ईरान के साथ सीजफायर की घोषणा की थी।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ईरान ने कुछ सिविल विमानों को अफगानिस्तान में भी भेजा था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका कि इनमें लड़ाकू विमान शामिल थे या नहीं। अमेरिकी अधिकारियों ने यह जानकारी नाम न बताने की शर्त पर साझा की।
पाकिस्तान सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। वहीं, अफगानिस्तान के नागरिक उड्डयन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि संघर्ष शुरू होने से पहले ईरानी एयरलाइन महान एयर का एक सिविल विमान काबुल में उतरा था। हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने अफगानिस्तान में किसी भी ईरानी विमान की मौजूदगी से इनकार किया है।
इस बीच, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए अमेरिका, ईरान और अन्य पक्षों के बीच उसकी मध्यस्थता की समीक्षा की मांग की है।
उन्होंने कहा, “यदि यह रिपोर्ट सही है, तो अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका की नए सिरे से समीक्षा की जानी चाहिए।” ग्राहम ने आगे कहा कि इजरायल के संबंध में पाकिस्तान के कुछ रक्षा अधिकारियों के पुराने बयानों को देखते हुए, यदि ये दावे सही साबित होते हैं तो उन्हें आश्चर्य नहीं होगा।
