पाकिस्तान की सेना का आक्रामक रुख: जनरल अहमद शरीफ का विवादास्पद बयान
पाकिस्तान की सेना का नया बयान
नई दिल्ली: हाल के दिनों में पाकिस्तान की सेना ने भारत के प्रति एक आक्रामक रुख अपनाया है। मई में भारत के खिलाफ मिली हार के बाद, पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों की बेचैनी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। अब, पाक सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत को खुली चुनौती दी है।
उनका बयान न केवल धमकी भरा है, बल्कि इसकी भाषा इतनी निम्न स्तर की है कि इसे सड़कछाप कहा जा सकता है। यह घटना पाकिस्तान की सेना में बढ़ती निराशा को दर्शाती है।
जनरल का उत्तेजक बयान
प्रेस ब्रीफिंग में जनरल अहमद शरीफ ने भारत पर आरोप लगाया कि वह पाकिस्तान के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि भारत दुश्मन के दुश्मन को दोस्त मान रहा है। आगे उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, "ले आओ जो तुम्हें करना है। दाएं से आओ, बाएं से आओ, ऊपर से या नीचे से, अकेले या किसी के साथ। एक बार मजा ना करा दिया तो पैसे वापस।"
यह बयान स्पष्ट रूप से भारत को युद्ध की धमकी है, लेकिन इसका अनौपचारिक और अभद्र तरीका इसे किसी सैन्य अधिकारी के मुंह से नहीं लगता। ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई फिल्मी डायलॉग बोल रहा हो। इस प्रकार की भाषा का उपयोग पाकिस्तानी सेना की छवि को और खराब कर रहा है।
पहले भी विवादों में घिरे जनरल
यह पहली बार नहीं है जब जनरल अहमद शरीफ सुर्खियों में आए हैं। कुछ समय पहले, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने एक महिला पत्रकार को आंख मारकर इशारा किया था। इस घटना की सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना हुई और लोगों ने पाकिस्तानी सेना की मर्यादा पर सवाल उठाए।
अब इस नए बयान से ऐसा लगता है कि जनरल अपनी छवि सुधारने के बजाय और गिरते जा रहे हैं। ऐसे बयान न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की बदनामी करते हैं, बल्कि घरेलू स्तर पर भी सेना की विश्वसनीयता को कम करते हैं।
पाक सेना में बढ़ती बेचैनी के संकेत
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के भीतर गहरी असंतोष की स्थिति है। एक प्रमुख न्यूज चैनल की रिपोर्ट में सूत्रों ने बताया कि सैन्य प्रवक्ता का इस तरह की भाषा का उपयोग करना चिंताजनक है। पहले डीजी आईएसपीआर की कॉन्फ्रेंस में भारत विरोधी बातें औपचारिक और कूटनीतिक शब्दों में होती थीं। अब तंज और सड़कछाप शैली का आना आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है।
सूत्रों का कहना है कि मई की हार के बाद पाकिस्तान हताश है और ऐसे बयानों से अपनी कमजोरी छिपाने की कोशिश कर रहा है। यह बयान भारत-पाक संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकता है। जहां भारत शांति और विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, वहीं पाकिस्तान की सेना ऐसे उकसावे वाले कदम उठा रही है।
