पाकिस्तान में बढ़ते सैन्य तनाव और आंतरिक अशांति का सामना
पाकिस्तान की दोहरी चुनौती
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने क्षेत्र की स्थिति को पहले ही संवेदनशील बना दिया था। अब पाकिस्तान एक नई चुनौती का सामना कर रहा है। एक तरफ, अफगान वायुसेना के ड्रोन हमलों ने रावलपिंडी, क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा में उसके महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे इस्लामाबाद की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। दूसरी ओर, देश के भीतर भड़के हिंसक प्रदर्शनों ने सरकार को गंभीर संकट में डाल दिया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं, जिसमें 35 लोगों की जान जा चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं। इस प्रकार, पाकिस्तान बाहरी सैन्य दबाव और आंतरिक जनाक्रोश का सामना कर रहा है.
हिंसक प्रदर्शनों का बढ़ता प्रभाव
रविवार को कराची में 15, स्कार्दू में 8 और इस्लामाबाद में 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। ये प्रदर्शन मुख्य रूप से पाकिस्तान के शिया समुदाय द्वारा किए गए, जो देश की कुल आबादी का लगभग 20 प्रतिशत हैं। 25 करोड़ से अधिक जनसंख्या वाले इस देश में बहुसंख्यक सुन्नी मुस्लिम हैं, लेकिन शिया समुदाय का सामाजिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। खामेनेई की मौत के कारण उत्पन्न आक्रोश ने इस समुदाय को सड़कों पर ला दिया।
इस्लामाबाद में विरोध प्रदर्शन
इस्लामाबाद में हजारों लोग रेड जोन के पास इकट्ठा हुए, जहां संसद, सरकारी दफ्तर और विदेशी दूतावास स्थित हैं। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के सहयोगियों को गद्दार बताते हुए नारे लगाए और इजराइल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। राजधानी के एक बड़े होटल के पास 5,000 से 8,000 लोगों की भीड़ जुटी, जिसमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। लोग खामेनेई की तस्वीरों वाले पोस्टर लेकर विरोध जता रहे थे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को आंसू गैस और रबर की गोलियां चलानी पड़ीं।
अफगानिस्तान से बढ़ता सैन्य दबाव
इन आंतरिक अशांत हालात के बीच, पाकिस्तान को अफगानिस्तान से मिल रही सैन्य चुनौती ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार, हाल के हमलों का निशाना रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस, क्वेटा में 12वीं कोर मुख्यालय और खैबर पख्तूनख्वा के मोहम्मद एजेंसी क्षेत्र का ख्वाजई कैंप रहा। मंत्रालय ने कहा कि ये सटीक और समन्वित हवाई अभियान पाकिस्तानी सेना की ओर से अफगान हवाई क्षेत्र में की गई घुसपैठ के जवाब में चलाए गए।
पाकिस्तान की स्थिति पर चिंता
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने स्थिति को सामान्य रखने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन तालिबान ने भारत का प्रतिनिधि बनकर काम किया। यह आरोप क्षेत्रीय राजनीति को और जटिल बना रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक ओर, अफगानिस्तान के साथ बढ़ता सैन्य टकराव उसकी सुरक्षा और सामरिक क्षमता की परीक्षा ले रहा है, जबकि दूसरी ओर, देश के भीतर सांप्रदायिक संवेदनशीलता से जुड़े प्रदर्शनों ने आंतरिक स्थिरता को झकझोर दिया है। यदि हालात पर शीघ्र काबू नहीं पाया गया, तो यह संकट राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और गहरा हो सकता है।
