पाकिस्तान में महंगाई का संकट: ईंधन की कीमतें 380 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचीं
महंगाई की बढ़ती चुनौतियाँ
इस्लामाबाद - पाकिस्तान में आर्थिक संकट के चलते महंगाई एक बार फिर आम जनता के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। जीवन यापन की बढ़ती लागत, ईंधन की ऊंची कीमतें और रोजमर्रा की वस्तुओं की महंगाई ने मध्यम वर्ग और निम्न आय वाले परिवारों पर आर्थिक दबाव को बढ़ा दिया है। इस्लामाबाद सहित कई शहरों में नागरिकों ने महंगाई को लेकर चिंता व्यक्त की है और सरकार से राहत उपायों की मांग की है।
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, 29 मई 2026 को सरकार ने ईंधनों की कीमतों में लगभग 22 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की कमी की थी। इसके बाद डीजल की कीमत लगभग 380 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमत लगभग 381 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि उनकी आय में कोई विशेष वृद्धि नहीं हुई है, लेकिन आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इससे परिवारों का मासिक बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई लोगों का मानना है कि वैश्विक तनाव और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
इस्लामाबाद के एक निवासी ने बताया कि बढ़ती ईंधन लागत के कारण उन्हें अपनी कार को लंबे समय तक घर पर रखना पड़ा। उन्होंने कहा कि मोटरसाइकिल का रखरखाव और दैनिक यात्रा भी पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगी हो गई है। उनका कहना था कि "आय वही है, लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में घरेलू बजट संभालना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।"
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ता है, जिससे खाद्य पदार्थों, उपभोक्ता वस्तुओं और अन्य आवश्यक सेवाओं की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। इसका सबसे अधिक प्रभाव निम्न और मध्यम आय वर्ग पर पड़ रहा है।
हालांकि, आम नागरिकों का कहना है कि महंगाई का दबाव इतना अधिक है कि ईंधन की कीमतों में यह राहत भी पर्याप्त नहीं है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मुद्रास्फीति पर प्रभावी नियंत्रण और रोजगार व आय में वृद्धि नहीं होती, तब तक आम लोगों को राहत मिलना मुश्किल रहेगा।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही विदेशी कर्ज, कमजोर मुद्रा और ऊंची मुद्रास्फीति जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। इस स्थिति में बढ़ती महंगाई सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक और आर्थिक चुनौती बनती जा रही है।
