पीएम मोदी और नेतन्याहू की ताकत का प्रदर्शन, ट्रंप का समर्थन
हाल ही में, डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू को समर्थन दिया, जिससे उनकी ताकत का प्रदर्शन हुआ। ट्रंप ने भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने की बात की और मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ शांति समझौता करने का आग्रह किया। यह घटना वैश्विक भू-राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। जानें इस घटना के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
| May 25, 2026, 20:15 IST
ट्रंप का फोन कॉल और मोदी-नेतन्याहू की शक्ति
हाल के दिनों में यह चर्चा उठी है कि प्रधानमंत्री मोदी डोनाल्ड ट्रंप से भयभीत हैं। इसी तरह का एक झूठा आरोप इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर भी लगाया गया है कि ट्रंप उनसे नाराज हैं। लेकिन हाल ही में एक घटना ने मोदी और नेतन्याहू की ताकत को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया है। झूठ लंबे समय तक नहीं टिकता, उसे आसानी से नष्ट किया जा सकता है। दरअसल, अमेरिका की स्वतंत्रता के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दिल्ली के भारत मंडप कन्वेंशन सेंटर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस दौरान अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने मंच पर आकर कहा कि उनके साथ फोन पर कोई है। उन्होंने फोन का स्पीकर ऑन किया, और डोनाल्ड ट्रंप की आवाज सुनाई दी। ट्रंप ने कहा, 'मैं प्रधानमंत्री मोदी का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं।' यह सब आप शायद पहले सोशल मीडिया पर देख चुके होंगे, लेकिन ट्रंप ने फोन करने से पहले एक और महत्वपूर्ण कॉल की थी।
ट्रंप का इब्राहिम अकॉर्ड पर जोर
चीन में असफलता के बाद, ट्रंप को यह समझ में आ गया है कि भारत के बिना वह कुछ नहीं कर सकते। इसीलिए उन्होंने भारत में फोन करके कहा कि भारत मुझ पर 100 प्रतिशत भरोसा कर सकता है। पीएम मोदी को कॉल करने से पहले, ट्रंप ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, क़तर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन के नेताओं के साथ एक कॉन्फ्रेंस कॉल की। ट्रंप ने इन सभी मुस्लिम देशों से कहा कि वे इजराइल के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार रहें। हमें इब्राहिम अकॉर्ड को आगे बढ़ाना है।
मुस्लिम देशों के लिए ट्रंप का संदेश
आपको बता दें कि 2020 में साइन हुए इब्राहिम अकॉर्ड के तहत संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और मोरक्को पहले ही इजराइल के साथ शांति समझौता कर चुके हैं। लेकिन अब नेतन्याहू के दबाव में, ट्रंप ने सभी मुस्लिम देशों से कहा है कि वे इजराइल के साथ शांति समझौता करें। जैसे ही ट्रंप ने बाकी मुस्लिम देशों से शांति समझौता करने के लिए कहा, फोन पर अचानक सन्नाटा छा गया। मजाक में ट्रंप ने पूछा कि क्या सभी अभी भी लाइन पर हैं? रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने खासतौर पर सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान से कहा है कि वे इजराइल के साथ शांति समझौता करें। आपको बता दें कि सऊदी अरब, क़तर और पाकिस्तान के इजराइल के साथ कोई औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। लेकिन अगर अमेरिका के दबाव में ये देश इजराइल को मान्यता देते हैं, तो वैश्विक भू-राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है।
