पीएम मोदी का पश्चिम एशिया तनाव पर बयान: शांति की ओर बढ़ने का प्रयास
भारत का रुख स्पष्ट
पीएम मोदी ने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर भारत की स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांति की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। लोकसभा में चर्चा के दौरान उन्होंने इस कठिन परिस्थिति का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का प्रभाव विश्व के कई देशों पर पड़ रहा है, और भारत भी इससे अछूता नहीं है। यदि यह युद्ध लंबा चलता है, तो यह एक गंभीर संकट का रूप ले सकता है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि भारत इस स्थिति से भी उबर जाएगा, जैसे कि उसने कोरोना महामारी के दौरान किया था। पीएम ने यह भी बताया कि ऐसे संकटों का कुछ तत्व गलत फायदा उठाने की कोशिश करते हैं, इसलिए सभी कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने वाली एजेंसियों को सतर्क रखा गया है।
पेट्रोल-डीजल और गैस की आपूर्ति
पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार का प्रयास है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति में कोई बाधा न आए। भारत अपनी आवश्यकताओं का 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, और इस आपूर्ति में अनिश्चितता को देखते हुए घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार और उद्योग के संयुक्त प्रयासों से हम इन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
ऊर्जा आपूर्ति का डायवर्सिफिकेशन
भारत ने पिछले 11 वर्षों में अपनी ऊर्जा जरूरतों की आपूर्ति का डायवर्सिफिकेशन किया है। पहले भारत 27 देशों से कच्चे तेल और गैस का आयात करता था, अब यह संख्या 41 देशों तक पहुंच गई है। इसके अलावा, भारत ने कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है, और वर्तमान में 53 लाख मीट्रिक टन का स्ट्रैटिजिक रिजर्व है।
इथेनॉल मिक्सिंग से लाभ
भारत विभिन्न सप्लायर्स के साथ संपर्क में है ताकि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। पिछले 10-11 वर्षों में इथेनॉल की मिक्सिंग को बढ़ाया गया है, जिससे पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जा रहा है। रेलवे के विद्युतीकरण से भी काफी लाभ हो रहा है, जिससे भारत को अतिरिक्त तेल की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।
