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प्रधानमंत्री मोदी का लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर बयान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर बयान दिया, जिसमें उन्होंने भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि भारत इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित है और सभी मिशन प्रभावित भारतीयों की सहायता में जुटे हैं। पीएम मोदी ने ऊर्जा आयात में विविधता लाने और इथेनॉल के उत्पादन पर भी चर्चा की। उनका कहना था कि सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रही है ताकि संकट का समाधान शीघ्र हो सके।
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प्रधानमंत्री मोदी का लोकसभा में पश्चिम एशिया संकट पर बयान

संसद के बजट सत्र में प्रधानमंत्री का संबोधन

संसद का बजट सत्र 2026 लाइव: सोमवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में उत्पन्न हालात पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि भारत इस क्षेत्र में चल रहे संघर्ष से सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक है। हमारे सभी मिशन प्रभावित भारतीयों की सहायता में लगे हुए हैं।


पीएम मोदी ने कहा कि वह इस संकट पर चर्चा करने के लिए खड़े हुए हैं, जो अब तीन हफ्तों से अधिक समय से जारी है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया इस संकट का शीघ्र समाधान चाहती है। इस युद्ध ने भारत के सामने कई अप्रत्याशित चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। उन्होंने संसद से यह संदेश देने की आवश्यकता पर जोर दिया कि संकट का समाधान जल्द होना चाहिए। उन्होंने सदन में उन भारतीयों की जानकारी दी जो युद्ध के बीच स्वदेश लौटे हैं और कहा कि उनकी सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।



उन्होंने आगे कहा कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में अपने कच्चे तेल के आयात में विविधता लाई है। पहले 27 देशों से ऊर्जा आयात होता था, अब यह संख्या 41 हो गई है। हमारी रिफाइनिंग क्षमता में भी वृद्धि हुई है। वर्तमान में हमारे पास 53 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का भंडार है, और हमारा लक्ष्य 65 लाख मीट्रिक टन का है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सभी आवश्यक सामान सुरक्षित रूप से भारत पहुंचें।


पीएम मोदी ने बताया कि पिछले 10-11 वर्षों में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी मिश्रण पर काफी काम हुआ है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण किया जा रहा है, जिससे बचत हो रही है। उन्होंने मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर जोर दिया। आज वैकल्पिक ईंधन पर जो प्रयास हो रहे हैं, उससे भारत का भविष्य सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में पश्चिम एशिया की महत्वपूर्ण भूमिका है।


सरकार वर्तमान संकट के शॉर्ट टर्म, मिड टर्म और लॉन्ग टर्म प्रभावों के लिए रणनीति के साथ काम कर रही है। सभी हितधारकों के साथ चर्चा की जा रही है और जहां जरूरत है, सहायता प्रदान की जा रही है। एक इंटर-मंत्रालयी समूह बनाया गया है, जो प्रतिदिन मिल रहा है। भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है और खरीफ सीजन की बुवाई सही तरीके से हो सके, इसके लिए खाद्य व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।


उन्होंने कहा कि पहले भी सरकार ने किसानों पर संकटों का बोझ नहीं पड़ने दिया था। उदाहरण के लिए, जब यूरिया की एक बोरी की कीमत तीन हजार रुपये तक पहुंच गई थी, तब भारत के किसानों को वही बोरी तीन सौ रुपये से भी कम कीमत पर उपलब्ध कराई गई थी।