प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा: क्या बदलेंगे भारत-इजराइल संबंध?
प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा का महत्व
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25-26 फरवरी को इजराइल की यात्रा पर जा रहे हैं, जो 2017 के बाद उनकी पहली यात्रा होगी। यह यात्रा कई महत्वपूर्ण कारणों से विशेष है, जिसमें भारत के रणनीतिक हित और हाल के घटनाक्रम शामिल हैं।
भारत का हालिया कदम
हाल ही में भारत ने इजराइल के वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार के खिलाफ फिलिस्तीन का समर्थन किया है। भारत ने 100 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर इन अवैध बस्तियों की निंदा की है। भारत ने हमेशा दो-राष्ट्र समाधान और फिलिस्तीनी लोगों के अधिकारों का समर्थन किया है।
हालांकि, पहले भारत का नाम वेस्ट बैंक विस्तार की निंदा करने वाली सूची में नहीं था, लेकिन बाद में इसे भारत-अरब लीग मंत्रिस्तरीय संयुक्त बयान में शामिल किया गया।
भारत-इजराइल संबंधों की मजबूती
भारत और इजराइल के बीच के राजनयिक संबंध 2014 में मोदी के सत्ता में आने के बाद और मजबूत हुए हैं। मोदी और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच की व्यक्तिगत दोस्ती भी इस संबंध को और गहरा बनाती है। हाल ही में नेतन्याहू ने एक पोस्ट में मोदी को अपने खास दोस्त के रूप में बताया।
अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि मोदी नेतन्याहू से गाजा संघर्ष के मुद्दे पर कैसे बातचीत करेंगे। इजराइल के अर्थशास्त्र व्याख्याता कफिर तशुवा के अनुसार, भारत ने हमेशा मध्य पूर्व के मामलों में संतुलन बनाए रखा है।
रक्षा सहयोग पर ध्यान
मोदी की इस यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। इजराइल को वैश्विक स्तर पर रक्षा नवाचार का नेता माना जाता है, विशेषकर एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम में। भारत इजराइल के साथ एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस के संयुक्त विकास पर विचार कर रहा है।
भारत की रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए यह प्रयास पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर घोषित मिशन सुधर्शन चक्र से जुड़ा है। इसके अलावा, मोदी की यात्रा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कृषि और स्वच्छ पेयजल जैसे विषयों पर भी चर्चा करेगी।
