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प्रधानमंत्री मोदी की मंत्रिपरिषद की बैठक: दो साल की उपलब्धियों की समीक्षा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तीसरी सरकार के दो साल पूरे होने से पहले मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में सरकार की उपलब्धियों की समीक्षा की गई और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई। बैठक में आर्थिक संकट, मंत्रालयों के कार्यों और संभावित फेरबदल पर भी विचार किया गया। जानें इस बैठक में क्या-क्या हुआ और मोदी सरकार की योजनाएँ क्या हैं।
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प्रधानमंत्री मोदी की मंत्रिपरिषद की बैठक: दो साल की उपलब्धियों की समीक्षा

प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण बैठक

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी तीसरी सरकार के दो साल पूरे होने से पहले मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक गुरुवार की शाम को प्रधानमंत्री कार्यालय में आयोजित की गई, जिसमें मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि मोदी 20 मई को पांच देशों की यात्रा से लौटे थे, और इस बैठक की योजना उनके विदेश दौरे से पहले ही बनाई गई थी।


यह बैठक, जो प्रधानमंत्री कार्यालय 'सेवा तीर्थ' में हुई, इस वर्ष की पहली मंत्रिपरिषद की बैठक थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी अध्यक्षता की, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित सभी मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस बैठक में सरकार के पिछले दो वर्षों के कार्यों की समीक्षा के साथ-साथ मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में 12 वर्षों की उपलब्धियों पर भी चर्चा की गई।


बैठक का आरंभ गुरुवार की शाम साढ़े चार बजे हुआ और यह रात नौ बजे के बाद तक चली। इस दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के कार्यान्वयन और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों के कार्यों की भी समीक्षा की, जिसमें कई विभागों के मंत्रियों ने अपने कार्यों का प्रेजेंटेशन दिया। इस समीक्षा के आधार पर मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल की चर्चा भी की गई।


यह ध्यान देने योग्य है कि मोदी ने अपनी तीसरी सरकार के गठन के बाद से कोई बदलाव नहीं किया है। अगले महीने, 9 जून को, सरकार के दो साल पूरे हो रहे हैं, और इस समय के आसपास फेरबदल की संभावनाएं हैं। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम का गठन भी होना है, और मोदी की पिछली सरकारों से कुछ मंत्रियों को संगठन के कार्यों के लिए भेजे जाने की चर्चा है।


बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के कार्यों, मुख्य निर्णयों, उनके परिणामों और भविष्य की प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की गई। सभी मंत्रालयों ने पहले ही कैबिनेट सचिवालय को पिछले दो वर्षों के सुधार उपायों और उनके कार्यों का विवरण प्रस्तुत किया था। इस बैठक में लगभग पांच घंटे तक सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।


इसके अलावा, बैठक में आर्थिक संकट पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों को सादगी से रहने और खर्चों को कम करने की सलाह दी। पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिससे सभी उत्पादों की कीमतें बढ़ रही हैं। रुपये की कीमत में गिरावट और भारत के आयात बिल में वृद्धि हो रही है। उर्वरक की आपूर्ति में कमी और सुपर अल नीनो के प्रभाव से फसलों की पैदावार पर भी असर पड़ सकता है।