प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्रियों के साथ पश्चिम एशिया संघर्ष पर की समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक का आयोजन
दिल्ली: प्रधानमंत्री ने शुक्रवार को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया के संघर्ष पर पहली बार मुख्यमंत्रियों के साथ एक बैठक की। इस बैठक में उन राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं हुए, जहां विधानसभा चुनाव चल रहे हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह बैठक डिजिटल माध्यम से आयोजित की गई थी, जिसका उद्देश्य 'टीम इंडिया' की भावना के तहत समन्वय स्थापित करना था।
बैठक में शामिल मुख्यमंत्री
बैठक में आंध्र प्रदेश के एन. चंद्रबाबू नायडू, उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, तेलंगाना के रेवंत रेड्डी, पंजाब के भगवंत मान, गुजरात के भूपेंद्र पटेल, जम्मू-कश्मीर के उमर अब्दुल्ला, हिमाचल प्रदेश के सुखविंदर सिंह सुक्खू, अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू और अन्य मुख्यमंत्री शामिल हुए। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह भी उपस्थित रहे।
राज्यों की तैयारियों की समीक्षा
एक सूत्र ने बताया कि प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मुख्यमंत्रियों से बातचीत की और राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की। चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री आचार संहिता (एमसीसी) के कारण इस बैठक में शामिल नहीं हो सके। कैबिनेट सचिवालय तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्य सचिवों के साथ अलग से बैठक करेगा।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा
25 मार्च को सरकार ने सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ बैठक की थी, जिसमें पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की गई थी। 23 मार्च को लोकसभा में दिए गए बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक हालात लंबे समय तक बने रह सकते हैं, और देश को एकजुट रहने की आवश्यकता है, जैसा कि कोविड-19 महामारी के दौरान था।
सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता
मोदी ने कहा कि सभी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रखा गया है और तटीय, सीमावर्ती, साइबर और रणनीतिक ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकारों से ऐसे तत्वों पर कड़ी निगरानी और त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया।
सामूहिक शक्ति पर विश्वास
लोकसभा में अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने देश की सामूहिक शक्ति पर विश्वास जताते हुए कहा कि जब हर सरकार और हर नागरिक एक साथ होते हैं, तो हम हर चुनौती का सामना कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कोविड-19 के बाद चुनौतियां लगातार बढ़ती रही हैं और ऐसा कोई साल नहीं रहा जब भारत और भारतीयों की परीक्षा न हुई हो।
