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प्रधानमंत्री मोदी ने सेवानिवृत्त सांसदों को भावुक विदाई दी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों को भावुक विदाई दी। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के योगदान की सराहना की और कहा कि राजनीति में कोई अंत नहीं होता। मोदी ने सदन की परंपराओं को याद करते हुए कहा कि ऐसे क्षण सभी दलों को एकजुट करते हैं। इस अवसर पर उन्होंने रामदास अठावले और उपसभापति हरिवंश की प्रशंसा की। यह विदाई समारोह सदन में भावनाओं का ज्वार लेकर आया, जिसमें सांसदों के अनुभवों को साझा किया गया।
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प्रधानमंत्री मोदी ने सेवानिवृत्त सांसदों को भावुक विदाई दी

नई दिल्ली में भावनाओं का सैलाब


नई दिल्ली: राज्यसभा में एक बार फिर भावनाओं का ज्वार देखने को मिला जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों को संबोधित किया। यह अवसर उन 37 सांसदों की विदाई का था, जिनका कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो रहा है। मोदी ने सदन की परंपराओं को याद करते हुए कहा कि ऐसे क्षण सभी दलों को एकजुट करते हैं। विशेष रूप से रामदास अठावले और उपसभापति हरिवंश पर उनकी टिप्पणियां सभी को छू गईं। हास्य और सम्मान का यह मिश्रण सदन को जीवंत बनाए रखता है।


वरिष्ठ नेताओं का सम्मान

प्रधानमंत्री मोदी ने मल्लिकार्जुन खड़गे, शरद पवार और एचडी देवेगौड़ा जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी आधी से अधिक जिंदगी संसदीय सेवा में बीती है। ऐसे समर्पित नेताओं से हर सांसद को सीखना चाहिए। उनकी निष्ठा और योगदान सदन की ताकत रहे हैं। जब रामदास अठावले का जिक्र आया, तो सदन हंसी से गूंज उठा। मोदी ने कहा कि पहले सदन में हास्य-विनोद आम था, लेकिन अब यह कम हो गया है। अठावले जी की व्यंग्यात्मक शैली सदन को हमेशा हंसाती रहती है। वे जा रहे हैं, लेकिन उनकी कमी महसूस नहीं होगी, क्योंकि वे बाहर भी व्यंग्य बिखेरते रहेंगे।


हरिवंश की लगन की तारीफ

उपसभापति हरिवंश की प्रशंसा करते हुए मोदी ने कहा कि उन्होंने लंबे समय तक सदन का संचालन किया और सभी का विश्वास जीता। संकट के समय अक्सर जिम्मेदारी उन्हीं पर आती है। सदन के बाहर भी वे युवाओं को जागरूक करते हैं। मोदी की बातें सुनकर हरिवंश भावुक हो गए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। अंत में मोदी ने कहा कि राज्यसभा की यह व्यवस्था अद्भुत है। नए सदस्य पुराने अनुभवों से सीखते हैं और पुराने नए को प्रेरित करते हैं। यह सदन लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बना रहेगा।


भावुक विदाई का पल

प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यसभा में हर दो साल बाद ऐसा अवसर आता है जब भावुकता छा जाती है। सदन में गंभीर बहसें होती हैं, कभी खट्टे-मीठे अनुभव भी मिलते हैं। विदाई के समय दलगत भावनाएं पीछे छूट जाती हैं और एक साझा सद्भाव उभरता है। कुछ सदस्य फिर से सदन लौटेंगे, जबकि कुछ नए क्षेत्रों में योगदान देंगे।


राजनीति में कोई अंत नहीं

मोदी ने जोर देकर कहा कि राजनीति में कभी भी फुल स्टॉप नहीं लगता। भविष्य हर किसी का इंतजार कर रहा है। रिटायर हो रहे सांसदों का योगदान देश को हमेशा मिलता रहेगा। उन्होंने सभी के उत्तम कार्यों की सराहना की और कहा कि उनका अनुभव आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शन बनेगा।