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प्रशांत भूषण का अन्ना आंदोलन पर पछतावा: क्या भाजपा को मिला था सबसे बड़ा लाभ?

प्रशांत भूषण ने अन्ना आंदोलन पर अपने पछतावे का इजहार करते हुए कहा कि इस आंदोलन का सबसे बड़ा लाभ भाजपा को मिला। उन्होंने अरविंद केजरीवाल और मनमोहन सिंह पर भी टिप्पणी की। भूषण का मानना है कि आंदोलन ने भाजपा को सत्ता में लाने का रास्ता तैयार किया। इस बयान ने एक बार फिर अन्ना आंदोलन और उससे निकली राजनीति पर नई बहस छेड़ दी है। जानें पूरी कहानी में और क्या कहा गया।
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प्रशांत भूषण का अन्ना आंदोलन पर पछतावा: क्या भाजपा को मिला था सबसे बड़ा लाभ?

प्रशांत भूषण का बयान


नई दिल्ली: अन्ना आंदोलन, जिसने लगभग 15 साल पहले भारतीय राजनीति में हलचल मचाई थी, के एक प्रमुख नेता प्रशांत भूषण ने अब इस पर अपने पछतावे का इजहार किया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और आम आदमी पार्टी के पूर्व सदस्य भूषण का कहना है कि इस आंदोलन का सबसे बड़ा लाभ भाजपा को मिला, जिसने सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने का मार्ग प्रशस्त किया।


क्यों है पछतावा?

भूषण ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा कि उन्हें इस बात का गहरा अफसोस है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ अन्ना आंदोलन अंततः भाजपा के सत्ता में आने का कारण बना। उन्होंने कहा, "मुख्य पछतावा इस बात का है कि हमारे आंदोलन का सहारा लेकर भाजपा ने न केवल कांग्रेस को गिराया, बल्कि खुद भी सत्ता में आ गई।"


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह भाजपा अटल बिहारी वाजपेयी के समय की नहीं है, बल्कि यह मोदी-शाह की भाजपा है, जिसने देश, संविधान और मौलिक अधिकारों को नुकसान पहुंचाया है।


मनमोहन सिंह पर हमलों का अफसोस

भूषण ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर अन्ना आंदोलन के दौरान हुए हमलों पर भी खेद व्यक्त किया। उनके अनुसार, संभव है कि गठबंधन की मजबूरियों के कारण मनमोहन सिंह को उस समय भ्रष्टाचार की गंभीरता का एहसास नहीं हुआ हो।


केजरीवाल और कुमार विश्वास की सोच

भूषण ने आंदोलन को मिले आरएसएस के समर्थन पर सवाल उठाते हुए स्वामी रामदेव और श्री श्री रविशंकर पर भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उस समय उन्हें यह समझ नहीं आया कि ये लोग भाजपा के इशारे पर आंदोलन का समर्थन कर रहे थे।


भूषण ने यह भी कहा, "कुमार विश्वास के भाजपा के प्रति समर्थन के बारे में मुझे अंदाजा नहीं था। बाद में अरविंद केजरीवाल की भी राइट विंग सोच सामने आने लगी।"


केजरीवाल पर आरोप

प्रशांत भूषण ने अरविंद केजरीवाल पर आंदोलन को धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इंडिया अगेंस्ट करप्शन से जुड़े कई लोग वैकल्पिक राजनीति के उद्देश्य से आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे।


उन्होंने कहा, "हमने 32 पॉलिसी कमेटियां बनाई थीं। विशेषज्ञों ने रिपोर्ट दी थी। लेकिन केजरीवाल ने कहा कि हमें किसी पॉलिसी की जरूरत नहीं है, जब मुद्दा आएगा तब राजनीतिक रूप से सुविधाजनक स्टैंड लेंगे।"


भूषण के अनुसार, इसी समय उन्हें एहसास हुआ कि केजरीवाल पार्टी को सही दिशा में नहीं ले जाएंगे।


AAP की चुप्पी

प्रशांत भूषण के इन आरोपों पर आम आदमी पार्टी या अरविंद केजरीवाल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, उनके बयान ने अन्ना आंदोलन और उससे निकली राजनीति पर एक नई बहस को जन्म दिया है।