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प्रियंका गांधी की नई भूमिका: असम में कांग्रेस की रणनीति पर सवाल

कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी वाड्रा को असम में उम्मीदवारों की छंटनी के लिए स्क्रीनिंग कमेटी का प्रमुख नियुक्त किया है। यह निर्णय कई सवाल उठाता है, जैसे कि प्रियंका की भूमिका और कांग्रेस की चुनावी रणनीति। असम में भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है। इसके साथ ही, प्रियंका की सक्रियता केरल में भी देखने को मिलेगी, जहां वे सांसद हैं। जानें इस निर्णय का कांग्रेस के अंदर के सत्ता संघर्ष पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
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प्रियंका गांधी की नई भूमिका: असम में कांग्रेस की रणनीति पर सवाल

प्रियंका गांधी का नया दायित्व

कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी वाड्रा को असम में उम्मीदवारों की छंटनी के लिए बनाई गई स्क्रीनिंग कमेटी का प्रमुख नियुक्त किया है, जो एक महत्वपूर्ण संदेश है। पिछले तीन वर्षों से प्रियंका खड़गे की कमेटी में महासचिव के रूप में कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें कोई विशेष जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। यह सवाल उठता है कि यदि उनमें इतनी क्षमता है, तो उन्हें जिम्मेदारी क्यों नहीं सौंपी गई। चुनाव के समय वे सक्रिय होती हैं, लेकिन कांग्रेस संगठन में उनकी कोई स्थायी भूमिका नहीं है। अब जब उन्हें असम में स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है, तो यह जानना जरूरी है कि इसका क्या अर्थ है?


कांग्रेस की असम रणनीति

कांग्रेस ने असम के लिए एक टीम बनाई है, जिसमें गौरव गोगोई अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। गोगोई मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदार हैं, और राज्य के प्रभारी महासचिव जितेंद्र सिंह राहुल गांधी के करीबी सहयोगी हैं। कांग्रेस ने 126 सीटों में से 100 पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है, जबकि 26 सीटें सहयोगी पार्टियों के लिए छोड़ दी गई हैं। प्रियंका गांधी की भूमिका इस संदर्भ में क्या होगी, यह स्पष्ट नहीं है।


प्रियंका की भूमिका पर चर्चा

कुछ कांग्रेस नेता यह भी कह रहे हैं कि प्रियंका ने जानबूझकर यह भूमिका स्वीकार की है। उनका मानना है कि असम में कांग्रेस के लिए यह एक सुनहरा अवसर है, क्योंकि भाजपा पिछले 10 वर्षों से सत्ता में है और लोगों में नाराजगी है। पिछले चुनाव में कांग्रेस को महाजोत के तहत 50 सीटें मिली थीं, और भाजपा के साथ वोट का अंतर भी बहुत कम था। यदि कांग्रेस जीतती है, तो इसका श्रेय प्रियंका को भी मिलेगा।


केरल में भी सक्रियता

प्रियंका की सक्रियता केरल में भी देखने को मिलेगी, जहां वे वायनाड से सांसद हैं। पिछले चुनाव में राहुल गांधी ने भी वायनाड से चुनाव लड़ा था, और केरल में सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ था। यदि प्रियंका केरल में भी कांग्रेस को जीत दिलाने में सफल होती हैं, तो इसका श्रेय भी उन्हें मिलेगा। इस प्रकार, असम और केरल दोनों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, जिससे कांग्रेस में उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है।


कांग्रेस में सत्ता संघर्ष

विपक्ष ने प्रियंका को असम की स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले को कांग्रेस के अंदर के सत्ता संघर्ष से जोड़कर देखना शुरू कर दिया है। संसद के शीतकालीन सत्र में प्रियंका के प्रदर्शन के बाद, कांग्रेस में सत्ता संघर्ष की चर्चाएं और भी बढ़ गई हैं।