प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल पर केंद्र सरकार को घेरा
महिला आरक्षण बिल पर प्रियंका गांधी का बयान
नई दिल्ली। कांग्रेस की महासचिव और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 1928 में मोतीलाल नेहरू द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट ने महिलाओं के समान अधिकारों की नींव रखी थी, जिसे कराची अधिवेशन में पारित किया गया। प्रियंका ने बताया कि इसी ‘वन वोट वन वैल्यू’ के सिद्धांत के कारण भारतीय महिलाओं को आजादी के पहले दिन से ही वोट का अधिकार मिला, जबकि अमेरिका जैसे देशों को इसके लिए 150 साल का समय लगा। उन्होंने पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दिया और कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को महत्वपूर्ण भूमिका में लाने का प्रयास किया है।
मोतीलाल नेहरू जी ने साल 1928 में एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे उन्होंने कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति को सौंपा था।
मोतीलाल नेहरू जी एक समिति के अध्यक्ष थे और तब उन्होंने 19 मूल अधिकारों की सूची बनाई थी।
1931 में सरदार पटेल जी की अध्यक्षता में कराची अधिवेशन हुआ था, जिसमें इस… pic.twitter.com/n2wo5lpDrR
— Congress (@INCIndia) April 16, 2026
महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण कांग्रेस की पहचान है
महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारतीय महिलाओं को वोटिंग का अधिकार दिलाने की नींव एक नेहरू ने रखी थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ‘वन वोट वन वैल्यू’ की सोच के कारण भारत ने अमेरिका से पहले महिलाओं को समान अधिकार दिए। प्रियंका ने भाजपा को याद दिलाया कि महिलाओं का राजनीतिक सशक्तिकरण कांग्रेस के डीएनए में है, जिसकी शुरुआत दशकों पहले नेहरू परिवार ने की थी।
संसद में ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक’ पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह पर भी हमला बोला। उन्होंने शाह को आज के युग का चाणक्य बताते हुए कहा कि वह बिना विपक्ष से चर्चा किए अपनी योजनाएं बनाते हैं। प्रियंका ने आरोप लगाया कि सरकार यह बिल बिना किसी ठोस तैयारी के लेकर आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंशा साफ है तो वर्तमान 543 सीटों में से महिलाओं को 33% आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रही तो ऐसे फैसलों से लोकतंत्र की मूल भावना प्रभावित होगी।
महिला आरक्षण पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने कहा कि सबसे पहले महिला आरक्षण की बात कांग्रेस ने की थी। उन्होंने कहा कि कराची अधिवेशन में इस पर प्रस्ताव पास किया गया था। प्रियंका गांधी ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पर चर्चा की लेकिन यह नहीं बताया कि उस समय इसका विरोध किसने किया था।
जातिगत जनगणना की आवश्यकता पर जोर
कांग्रेस सांसद ने कहा कि महिला आरक्षण 2029 तक लागू होना चाहिए। इसके लिए सीटों की संख्या 50 फीसदी बढ़ानी पड़ेगी और 850 कर दी जाएगी। प्रियंका ने कहा कि जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, सभी वर्गों को उचित हिस्सा नहीं मिल सकता।
ओबीसी वर्ग की अनदेखी का आरोप
प्रियंका गांधी ने कहा कि पीएम ने हल्के में ओबीसी वर्ग की बात की है। यह बड़ी संख्या है और इसे तकनीकी मुद्दा बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पीएम इस विधेयक के जरिए ओबीसी वर्ग का हक छीनना चाहते हैं।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि इस देश को किसी एक का हक छीनकर नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार मौजूदा 543 सीटों में ही 33 फीसदी आरक्षण का एलान क्यों नहीं कर देती। इससे काम भी हो जाएगा और विपक्ष का विरोध भी कम होगा। प्रियंका ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री ईमानदारी से इस कदम को उठाते तो पूरा सदन उनके साथ खड़ा होता।
