फरीदाबाद में नए एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण, यातायात में होगी सुधार
फरीदाबाद के यात्रियों के लिए खुशखबरी
फरीदाबाद, 09 मई। दिल्ली के निकट स्थित फरीदाबाद के लाखों दैनिक यात्रियों के लिए एक सकारात्मक समाचार आया है। केंद्रीय राज्यमंत्री और स्थानीय सांसद कृष्ण पाल गुर्जर ने बताया कि आश्रम चौक से फरीदाबाद के प्रवेश द्वार (सराय ख्वाजा/सेक्टर-37) तक एक नए एलिवेटेड कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। इस 800 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट से दिल्ली-NCR की कनेक्टिविटी में महत्वपूर्ण सुधार होगा। इस कॉरिडोर के निर्माण के बाद, दिल्ली के मध्य से फरीदाबाद की सीमा तक पहुंचने में केवल 15 मिनट का समय लगेगा।
बदरपुर बॉर्डर पर जाम से मिलेगी राहत
बदरपुर बॉर्डर के भारी जाम से मिलेगी मुक्ति
वर्तमान में, दिल्ली और फरीदाबाद के बीच यातायात का मुख्य मार्ग साढ़े चार किलोमीटर लंबा बदरपुर एलिवेटेड फ्लाईओवर है। लेकिन वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण, बदरपुर बॉर्डर, आली गांव और सराय ख्वाजा जैसे क्षेत्रों में पीक आवर्स के दौरान गंभीर जाम की स्थिति बनी रहती है। प्रस्तावित सिक्स-लेन कॉरिडोर इन भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों के ऊपर से गुजरेगा, जिससे गुरुग्राम, नोएडा और दिल्ली से आने वाले वाहनों को बिना सिग्नल के यात्रा करने का अवसर मिलेगा। यह पूरी तरह से नॉन-स्टॉप कॉरिडोर होगा, जो ट्रैफिक लाइटों की समस्या को समाप्त कर देगा।
निर्माण कार्य की प्रक्रिया
पर्यावरण मंजूरी के बाद शुरू होगा निर्माण
इस परियोजना की तकनीकी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। मंत्री गुर्जर ने बताया कि फाइल अब पर्यावरण एवं वन विभाग के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेजी गई है। जैसे ही अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त होगा, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इस परियोजना को जल्द से जल्द लागू करना है ताकि बदरपुर रोड पर लगने वाले घंटों के जाम से जनता को स्थायी राहत मिल सके।
भविष्य की कनेक्टिविटी
भविष्य की मेगा कनेक्टिविटी का हिस्सा
यह एलिवेटेड कॉरिडोर केवल एक सड़क नहीं है, बल्कि फरीदाबाद को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और आगामी जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से जोड़ने वाली कड़ियों का हिस्सा है। केंद्र सरकार की इस पहल से न केवल यात्रियों का ईंधन और समय बचेगा, बल्कि फरीदाबाद के औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। बदरपुर बॉर्डर पर वाहनों का दबाव कम होने से प्रदूषण के स्तर में भी कमी आने की संभावना है।
