Newzfatafatlogo

फ्रांस ने अमेरिका से सोना वापस लाकर आर्थिक लाभ उठाया

फ्रांस ने अमेरिका से 129 टन सोना वापस लाकर अपने खजाने में वृद्धि की है। इस कदम से न केवल फ्रांस की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है, बल्कि यह दर्शाता है कि आधुनिक युग में युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि आर्थिक बुद्धिमत्ता से भी लड़े जाते हैं। जानें इस रणनीति के पीछे की कहानी और इसके प्रभाव।
 | 
फ्रांस ने अमेरिका से सोना वापस लाकर आर्थिक लाभ उठाया

फ्रांस का सोने का नया भंडार

फ्रांस ने एक ही समय में अमेरिका की वित्तीय स्थिति को कमजोर करते हुए अपने खजाने में वृद्धि की है। बैंक ऑफ फ्रांस ने अमेरिका में रखा अपना शेष सोना बेचकर यूरोप में नया गोल्ड भंडार स्थापित किया है। यह प्रक्रिया जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच पूरी हुई, जिससे न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक में सोने को रखने की पुरानी परंपरा समाप्त हो गई। सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के दौरान, फ्रांसीसी केंद्रीय बैंक ने 26 चरणों में लेन-देन करके लगभग €12.8 बिलियन (लगभग $14.7 बिलियन) का लाभ कमाया। इससे 2024 में €7.7 बिलियन (लगभग $8.8 बिलियन) के घाटे को 2025 में €8.1 बिलियन (लगभग $9.3 बिलियन) के लाभ में बदल दिया गया। फ्रांसीसी अधिकारियों ने इसे तकनीकी उन्नति के रूप में देखा है। गवर्नर फ्रांकोइस विलेरॉय डी गैलहाउ ने इसे पुराने सोने के बिस्कुटों को आधुनिक मानकों के अनुसार बदलने के प्रयास के रूप में बताया।


डॉलर पर विश्वास में कमी

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते, वैश्विक स्तर पर डॉलर के प्रति विश्वास में कमी आ रही है। फ्रांस ने अमेरिका से 129 टन सोना (लगभग 2 लाख करोड़ रुपये) वापस लाकर अपने कुल भंडार का 516 हिस्सा अपने देश में लाने का निर्णय लिया। यह प्रक्रिया जुलाई 2025 से मार्च 2026 के पहले सप्ताह के बीच पूरी हुई। पिछले साल जून में अमेरिका द्वारा ईरान पर बमबारी के बाद फ्रांस ने यह कदम उठाया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब युद्ध लंबा खींचता है और डॉलर पर दबाव बढ़ता है, तो देश अपने सोने को अपने पास रखना पसंद करते हैं। अब फ्रांस के पास 2,437 टन सोना पूरी तरह से घरेलू तिजोरी में सुरक्षित है।


फ्रांस ने अमेरिका में सोना बेचने का निर्णय क्यों लिया?

फ्रांस ने अमेरिका की वित्तीय जटिलताओं को समझते हुए न्यूयॉर्क से सोना वापस लाने की कठिन प्रक्रिया के बजाय एक स्मार्ट रणनीति अपनाई। जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच, फ्रांस के केंद्रीय बैंक ने वहां रखे अपने 129 टन 'गैर-मानक' सोने को बेचकर उसी राशि से यूरोपीय बाजार में उतना ही सोना खरीद लिया। इस चालाकी से फ्रांस ने न केवल परिवहन की समस्याओं को टाला, बल्कि मूल्य अंतर से €12.8 बिलियन का लाभ भी कमाया। इस प्रकार, फ्रांस ने बिना किसी शोर-शराबे के अमेरिका से अपना सोना निकालकर अपनी तिजोरी को भर लिया। यह कदम दर्शाता है कि आधुनिक युग में युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि आर्थिक बुद्धिमत्ता से भी लड़े जाते हैं।