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बंगाल चुनाव: अमित शाह की तस्वीर और ममता बनर्जी का चुनावी जश्न

भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने मतदान के पहले चरण के बाद ढलते सूरज की तस्वीर साझा की है, जबकि ममता बनर्जी ने चुनाव जीतने का दावा किया है। इस लेख में बंगाल चुनाव के मतदान की स्थिति, भाजपा की आईटी टीमों की भूमिका और मतदाता की चिंताओं पर चर्चा की गई है। जानें कि कैसे उच्च मतदान दर ने राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है और मोदी सरकार की सोच क्या है।
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बंगाल चुनाव: अमित शाह की तस्वीर और ममता बनर्जी का चुनावी जश्न

मतदान के बाद की स्थिति

भारत के गृह मंत्री अमित शाह ने मतदान के पहले चरण के 92.38 प्रतिशत के आंकड़े के बाद ढलते सूरज की एक तस्वीर साझा की है। यह सवाल उठता है कि क्या यह ममता बनर्जी, बंगाल या केंद्र सरकार के लिए है? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ममता ने चुनाव के बाद कहा है कि वे बंगाल जीतकर दिल्ली की ओर बढ़ेंगी। उनका नारा है, "खेला होबे!" यानी पूरे देश को हिलाने का इरादा। हालांकि, अमित शाह की तस्वीर सोशल मीडिया पर ज्यादा चर्चा का विषय नहीं बनी।


हालांकि मैं सोशल मीडिया से दूर हूं, लेकिन भक्तों और विरोधियों की नजरें इस पर हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि दक्षिणपंथी समर्थक, जो पहले सोशल मीडिया पर सक्रिय थे, अब या तो गायब हैं या चुप हैं। सरकार का बचाव भी नहीं किया जा रहा है।


भाजपा की आईटी टीमों की भूमिका

यह सवाल उठता है कि भाजपा और संघ की आईटी टीमें क्या कर रही हैं? उनकी भूमिका मुख्य रूप से नकारात्मक खबरों को मीडिया से दूर रखने और हेडलाइन प्रबंधन तक सीमित है। मोदी और शाह ने जो नैरेटिव तैयार किया है, उसका उद्देश्य असली मुद्दों जैसे गैस, ईंधन, आर्थिक संकट और बेरोजगारी पर चर्चा को रोकना है। यदि बंगाल में वोटर लिस्ट की धांधली से जीत हासिल की गई, तो इसके जश्न में डीजल, गैस और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों की चर्चा दब जाएगी।


मतदाता की चिंताएं

हालांकि, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट से मिली अनिश्चितताओं ने बंगाल में वोटर लिस्ट को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सभी समुदायों के लोग मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। मेरा मानना है कि यदि किसी घर में एक भी वोटर का नाम कट गया, तो बाकी सभी सदस्यों ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ वोट दिया होगा। ममता बनर्जी ने वोट के अधिकार के लिए संघर्ष किया है, जबकि मोदी और शाह ने चुनाव आयोग से मतदाता सूचियों में छेड़छाड़ की।


उच्च मतदान दर

हालांकि मैंने चुनाव में भाग नहीं लिया, लेकिन 'द टेलिग्राफ' की रिपोर्ट ने स्थिति को स्पष्ट किया। उत्तरी मिदनापुर के गरबेता क्षेत्र में बूथ 238 पर 536 में से 533 मतदाताओं ने वोट डाले, जो लगभग 99.6 प्रतिशत है। यहां 121 हिंदू और 415 मुस्लिम मतदाता थे। केवल दो लोग बीमारी के कारण वोट नहीं डाल सके। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में भी उच्च मतदान दर देखी गई है।


लोगों में यह चिंता है कि यदि उन्होंने वोट नहीं डाला, तो उनका नाम मतदाता सूची से कट सकता है। इससे राशन मिलना बंद हो सकता है और उन्हें घुसपैठिए माना जा सकता है। इसलिए मतदान ही उनकी नागरिकता का प्रमाण बनेगा। 'द टेलिग्राफ' की रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रवासी मतदाताओं ने वोट डालने के बाद अपनी उंगली पर लगी स्याही दिखाते हुए फोटो खिंचवाई।


मोदी सरकार की सोच

जबकि मोदी, शाह और भाजपा ने सोचा था कि यह प्रक्रिया घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए है, घरों में इसे राशन, अधिकार और पहचान के लिए खतरा माना गया। तो जिम्मेदार कौन है? मोदी सरकार और चुनाव आयोग। इस स्थिति में वोट किसके खिलाफ दिया जाएगा? यह स्पष्ट नहीं है कि अमित शाह ने सूर्यास्त की तस्वीर क्यों साझा की।