बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी में टूट के संकेत, विधायकों की कमी पर उठे सवाल
राजनीति में कोई स्थायी साथी नहीं होता
राजनीति में किसी का भी सगा नहीं होता, यहां तक कि पार्टियों का भी। पश्चिम बंगाल में वर्तमान घटनाक्रम इसी बात का संकेत दे रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की हार के बाद उनकी पार्टी का समर्थन भी कमजोर होता दिखाई दे रहा है। हालात यह हैं कि विधानसभा परिसर में आयोजित विरोध प्रदर्शन में केवल 35 विधायक ही शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि इस बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 80 विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा में पहुंचे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रदर्शन में आधे से अधिक विधायकों की अनुपस्थिति ने पार्टी में विभाजन की आशंका को बढ़ा दिया है.
विधायकों की अनुपस्थिति पर उठे सवाल
बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद, ममता बनर्जी ने बुधवार को एक बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बनाई थी। लेकिन जब केवल 35 विधायक ही इस प्रदर्शन में शामिल हुए, तो इसकी प्रभावशीलता कम हो गई। 45 विधायकों की अनुपस्थिति ने बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या ममता बनर्जी की पार्टी अब टूटने के कगार पर है?
टीएमसी का विरोध प्रदर्शन
टीएमसी ने विधानसभा परिसर में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा के पास चुनाव के बाद हुई हिंसा और सड़क किनारे से रेहड़ी-पटरी वालों को हटाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। यह टीएमसी का विपक्ष में जाने के बाद पहला बड़ा आंदोलन था। प्रदर्शन में विधायकों की बड़ी संख्या में अनुपस्थिति से पार्टी में दरार की बातें की जा रही हैं, लेकिन टीएमसी विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने किसी भी गुटबाजी या कलह से इनकार किया है.
ममता बनर्जी की बैठक
इस प्रदर्शन से एक दिन पहले, मंगलवार को कालीघाट में पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भाग लिया। हालांकि, इस बैठक में पार्टी के नेतृत्व के प्रति नाराजगी के संकेत भी मिले हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विधानसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद विधायकों की अनुपस्थिति एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश है.
