बजट सत्र में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की चर्चा
नई दिल्ली में बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू
नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र आज से अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर रहा है। इस दौरान लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष ने पहले चरण में स्पीकर के खिलाफ नोटिस दाखिल किया था, जिसमें 118 सदस्यों के हस्ताक्षर शामिल हैं। तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने पहले इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए थे, लेकिन अब उन्होंने स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने का निर्णय लिया है।
अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया
लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए आवश्यक है कि दो सांसदों के हस्ताक्षर, 14 दिन का नोटिस और सदन में 50 सदस्यों का समर्थन हो। कांग्रेस के तीन सांसद, मोहम्मद जावेद, कोडिकुनिल सुरेश और मल्लू रवि ने इस प्रस्ताव के लिए नोटिस दाखिल किया है, जिसे 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन प्राप्त है।
डिबेट की अध्यक्षता कौन करेगा?
यदि नोटिस को मंजूरी मिलती है, तो डिबेट का समय निर्धारित किया जाएगा। इस दौरान लोकसभा स्पीकर अपनी कुर्सी पर नहीं बैठेंगे। नियमों के अनुसार, डिप्टी स्पीकर कार्यवाही की अध्यक्षता करेंगे। चूंकि अभी तक डिप्टी स्पीकर का चुनाव नहीं हुआ है, इसलिए स्पीकर के पैनल में सबसे वरिष्ठ सांसद इस कार्य को संभालेंगे। इस मामले में जगदंबिका पाल के स्पीकर की कुर्सी पर बैठने की संभावना है।
अविश्वास प्रस्ताव का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। भारतीय संसद के इतिहास में पहला अविश्वास प्रस्ताव 1954 में जी.वी. मावलंकर के खिलाफ लाया गया था, जो 489 के मुकाबले 364 वोटों से हार गया था। 1966 में मधु लिमये ने हुकुम सिंह के खिलाफ प्रस्ताव लाया, लेकिन इसे संख्या की कमी के कारण खारिज कर दिया गया। 1987 में सोमनाथ चटर्जी ने बलराम जाखड़ के खिलाफ प्रस्ताव लाया, जो भी असफल रहा।
क्या विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या है?
लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए 272 वोटों की साधारण बहुमत की आवश्यकता है। तृणमूल कांग्रेस के समर्थन के बावजूद, विपक्ष के पास बहुमत नहीं है। वर्तमान लोकसभा में सरकार के पास 293 सांसदों का समर्थन है, जिसमें बीजेपी के 240, जेडीयू के 16, टीडीपी के 12 और अन्य एनडीए पार्टियों के सांसद शामिल हैं। वहीं, विपक्ष के पास कांग्रेस के 99 सांसद और अन्य पार्टियों के 238 सांसद हैं। इसका मतलब है कि यदि अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान होता है, तो विपक्ष की हार की संभावना अधिक है।
