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बांग्लादेश के नए पीएम तारिक रहमान का अल्पसंख्यकों के प्रति सकारात्मक संदेश

बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपने पहले संबोधन में अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि धर्म से नागरिकता पर कोई फर्क नहीं पड़ता। रहमान का यह बयान बांग्लादेश में हाल के समय में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं और योजनाओं का भी उल्लेख किया है, जिसमें कानून व्यवस्था में सुधार और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है। जानें इस संबोधन के पीछे की पूरी कहानी और बांग्लादेश-भारत संबंधों में संभावित सुधार के संकेत।
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बांग्लादेश के नए पीएम तारिक रहमान का अल्पसंख्यकों के प्रति सकारात्मक संदेश

तारिक रहमान का बयान और भारत के साथ संबंध

बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने हिंदुओं के प्रति एक ऐसा बयान दिया है, जिसने कट्टरपंथियों के साथ-साथ यूनुस के समर्थकों को भी चौंका दिया है। बीएनपी की जीत के बाद, रहमान ने अपने बयान से यह स्पष्ट किया है कि वह भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए तत्पर हैं। भारत की ओर से भी सकारात्मक पहलें हो रही हैं, जो दर्शाती हैं कि दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रहमान को शपथ ग्रहण के बाद पत्र भेजा और उन्हें दिल्ली आने का निमंत्रण दिया। इन घटनाओं ने बांग्लादेश और भारत के बीच के माहौल को बदलने की कोशिश की है।


धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति रहमान का संदेश

तारिक रहमान ने अपने पहले राष्ट्रीय संबोधन में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी धर्म हो, नागरिकता पर इसका कोई असर नहीं होना चाहिए। यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल के महीनों में बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं।


सरकार की प्राथमिकताएं और योजनाएं

रहमान ने कहा कि उनकी सरकार ऐसे समय में आई है जब देश आर्थिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और कमजोर कानून व्यवस्था से जूझ रहा है। उन्होंने 180 दिन का एक मास्टर प्लान पेश किया है, जिसमें हर मंत्रालय को समय सीमा के भीतर कार्य योजना लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी प्राथमिकता कानून व्यवस्था में सुधार और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।


यूनुस के शासनकाल की चुनौतियां

यूनुस के शासनकाल में बांग्लादेश में कई घटनाएं हुईं, जिन्होंने न केवल भारत को परेशान किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बांग्लादेश के कट्टरपंथियों की असलियत को उजागर किया। इस दौरान अल्पसंख्यकों पर हमले और सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं बढ़ गई थीं। रहमान ने भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते एक समिति भी गठित करने की योजना बनाई है।