बांग्लादेश में चुनावी हलचल: बीएनपी की बढ़ती लोकप्रियता और जमात की घटती स्थिति
बांग्लादेश में आम चुनाव की तैयारी
नई दिल्ली - बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के गिरने के बाद, आम चुनाव 12 फरवरी 2026 को आयोजित होने जा रहा है। इस चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में हलचल तेज हो गई है। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, राजनीतिक दलों के बीच आंतरिक विवाद भी सामने आ रहे हैं। इस बीच, ओपिनियन पोल में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को बढ़त मिलती दिख रही है।
बीएनपी और जमात के बीच प्रतिस्पर्धा
पिछले महीने के एक सर्वेक्षण में बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी गई थी। हालांकि, बीएनपी ने 70 प्रतिशत समर्थन प्राप्त कर जमात को पीछे छोड़ दिया है। लोगों का मानना है कि वे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पार्टी को वोट देंगे, जबकि जमात को केवल 19 प्रतिशत समर्थन मिला है।
तारिक रहमान की वापसी का प्रभाव
17 वर्षों के बाद तारिक रहमान की वापसी ने बीएनपी के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। उनकी वापसी से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है। एक ओपिनियन पोल के अनुसार, पिछले साल हुई हिंसा और हसीना की सरकार के गिरने के बाद बनी नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) को केवल 2.9 प्रतिशत समर्थन मिला है। बीएनपी को कई कारणों से लोगों का समर्थन मिल रहा है, जिसमें खालिदा जिया की मृत्यु के कारण भावनात्मक समर्थन भी शामिल है।
बांग्लादेश में सुरक्षा स्थिति
हसीना की सरकार के गिरने के बाद बांग्लादेश में अपराध बढ़ गया है, और हिंसा अपने चरम पर पहुंच गई है। इसके लिए कट्टरपंथी जमात को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि यदि जमात सत्ता में आती है, तो देश की स्थिति गंभीर हो सकती है। लोग शांति और विकास की चाह रखते हैं, न कि धार्मिक शासन की।
अवामी लीग के समर्थकों का बीएनपी की ओर झुकाव
ओपिनियन पोल में यह भी सामने आया है कि शेख हसीना के कई समर्थक अब बीएनपी का समर्थन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अवामी लीग को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया है, जिसके कारण उसके समर्थक बीएनपी के साथ खड़े हो रहे हैं। पिछले एक साल में अवामी लीग के कई समर्थकों को निशाना बनाया गया है, जिससे वे बीएनपी को एक सुरक्षित विकल्प मान रहे हैं।
चुनाव से पहले की हिंसा
हाल के दिनों में हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं, जिसमें 6 हिंदुओं को निशाना बनाया गया है। इंटेलिजेंस एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि चुनाव से पहले हिंसा और बढ़ सकती है। अधिकारियों ने कहा कि बॉर्डर पर हाई अलर्ट रहने की आवश्यकता है, क्योंकि आईएसआई भारत में भी उन्माद फैलाने की कोशिश कर सकती है।
