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बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी हत्या मामले में नया मोड़, आरोपी ने भारत में छिपने के दावे को किया खारिज

बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में नया मोड़ आया है। प्रमुख संदिग्ध फैसल करीम मसूद ने एक वीडियो संदेश जारी कर भारत में छिपने के आरोपों को खारिज किया है। उसने कहा कि वह दुबई में है और हत्या से उसका कोई संबंध नहीं है। यह मामला बांग्लादेश की राजनीति में गहराई से जुड़ा हुआ है, जहां हर असफलता का ठीकरा भारत पर फोड़ने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। क्या यह हत्या एक आंतरिक सत्ता-संघर्ष का नतीजा है? जानें इस जटिल मामले के बारे में और अधिक।
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बांग्लादेश में शरीफ उस्मान हादी हत्या मामले में नया मोड़, आरोपी ने भारत में छिपने के दावे को किया खारिज

हादी हत्या मामले में नया मोड़

बांग्लादेश में इस्लामवादी कट्टरपंथी और 'इंक़िलाब मंच' के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में एक नया मोड़ आया है, जिसने अंतरिम सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस संदिग्ध को ढाका ने भारत में छिपा हुआ बताया था, वही अब सामने आकर न केवल हत्या से इनकार कर रहा है, बल्कि बांग्लादेश सरकार के दावों को भी झूठा बता रहा है।


फैसल करीम मसूद का वीडियो संदेश

हादी हत्याकांड के प्रमुख संदिग्ध फैसल करीम मसूद उर्फ दाऊद (37) ने एक वीडियो संदेश में कहा है कि वह भारत में नहीं, बल्कि दुबई में है। उसने स्पष्ट किया कि उसका हादी की हत्या से कोई संबंध नहीं है और यह मामला एक गढ़ी हुई साजिश का हिस्सा है। मसूद ने यह भी कहा कि झूठे आरोपों और राजनीतिक दबाव के कारण उसे बांग्लादेश छोड़ना पड़ा।


बांग्लादेश सरकार के दावे पर सवाल

28 दिसंबर को ढाका ने कहा था कि हादी हत्याकांड के दो मुख्य आरोपी, फैसल करीम मसूद और आलमगीर शेख, भारत के मेघालय में स्थानीय सहयोगियों की मदद से भाग गए हैं। इस पर भारत की एजेंसियों ने कड़ा एतराज जताया था। अब मसूद के वीडियो संदेश ने बांग्लादेश सरकार के दावे को लगभग ध्वस्त कर दिया है।


मसूद का हादी से संबंध

मसूद ने स्वीकार किया कि वह गोलीकांड से पहले हादी के दफ्तर गया था, लेकिन उसने कहा कि उनका संबंध पूरी तरह पेशेवर था। वह एक आईटी उद्यमी है और पहले वित्त मंत्रालय में काम कर चुका है। मसूद का दावा है कि हादी ने उसे नौकरी दिलाने का वादा किया था और उसने उससे पांच लाख टका अग्रिम के रूप में लिए थे।


हिंसा और साजिश के आरोप

मसूद ने हादी की हत्या के लिए जमाती तत्वों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि हादी स्वयं भी उसी वैचारिक धारा का हिस्सा था। यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार 30 दिनों के अल्टीमेटम के दबाव में है। बांग्लादेश में यह आरोप भी लग रहे हैं कि हादी की हत्या और उसके बाद भड़की हिंसा एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है।


बांग्लादेश सरकार की कार्रवाई पर सवाल

ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त एसएन मोहम्मद नज़रुल इस्लाम, जिन्होंने मसूद के भारत भागने का दावा किया था, अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाए हैं। उनके बयान को मेघालय की डीजीपी ने बेबुनियाद बताया था।


हादी की हत्या का प्रभाव

12 दिसंबर को सिर में गोली लगने के बाद 18 दिसंबर को हादी की मौत हो गई थी। उसकी हत्या के बाद बांग्लादेश में हिंसा भड़क उठी थी, जिसका खामियाजा अल्पसंख्यक हिंदुओं को भुगतना पड़ा। यह मामला अब केवल एक हत्या की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बांग्लादेश की राजनीति और सोच का प्रतीक बन चुका है।


भारत पर आरोप लगाने की प्रवृत्ति

बांग्लादेश सरकार ने बिना किसी सबूत के भारत पर आरोप लगाने की प्रवृत्ति अपनाई है। जब आरोपी खुद कह रहा है कि वह दुबई में है, तो बांग्लादेश सरकार किस आधार पर भारत का नाम ले रही है? यह एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय बदनामी अभियान का हिस्सा लगता है।


सच्चाई का सामना करने की आवश्यकता

फैसल करीम मसूद का बयान इस पूरे नैरेटिव को चुनौती देता है। अगर उसके आरोपों में आधा भी सच है, तो सवाल उठता है कि क्या हादी की हत्या वास्तव में एक आंतरिक सत्ता-संघर्ष का नतीजा थी? बांग्लादेश को यह समझना होगा कि हर बार भारत को दोषी ठहराने से न तो उसकी आंतरिक समस्याएं सुलझेंगी, न लोकतंत्र मजबूत होगा।