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बिहार और पश्चिम बंगाल में महिलाओं के वोटिंग पर प्रभाव: राजनीतिक परिदृश्य का बदलाव

बिहार और पश्चिम बंगाल में महिलाओं के वोटिंग पर प्रभाव का विश्लेषण करते हुए, यह लेख बताता है कि कैसे नीतीश कुमार और ममता बनर्जी की योजनाएं महिलाओं को प्रभावित कर रही हैं। बिहार में राजद नेता का विवादास्पद वीडियो और पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता का बयान, दोनों ही इस बात का संकेत देते हैं कि महिलाएं जाति और धर्म से परे जाकर वोट देने के लिए तैयार हैं। जानें कैसे ये घटनाएं राजनीतिक परिदृश्य को बदल रही हैं।
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बिहार और पश्चिम बंगाल में महिलाओं के वोटिंग पर प्रभाव: राजनीतिक परिदृश्य का बदलाव

महिलाओं की वोटिंग पर प्रभाव

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले, नीतीश कुमार की सरकार ने महिलाओं को मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत 10 हजार रुपये देने की शुरुआत की, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल बदल गया। उस समय, बिहार के बेलागंज क्षेत्र से एक राजद नेता का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह दिल्ली से आए एक प्रमुख पत्रकार से बातचीत करते हुए कह रहे थे कि महिलाएं कैसे नीतीश कुमार को वोट देने के लिए घर से बाहर निकलेंगी। यदि कोई महिला नीतीश को वोट देने का विचार करती है, तो उसे पीटा जाएगा। इस वीडियो ने राजद को काफी नुकसान पहुँचाया, लेकिन यह भी दर्शाया कि बिहार की महिलाएं जाति से परे जाकर नीतीश कुमार को वोट दे रही थीं।


इसी तरह की स्थिति पश्चिम बंगाल में भी देखी जा रही है। भाजपा के नेता कालीपद सेनगुप्ता का एक बयान वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा कि महिलाएं ममता बनर्जी की लक्ष्मी भंडार योजना से प्रभावित होकर वोट करेंगी, इसलिए मतदान के दिन महिलाओं को घरों में बंद कर देना चाहिए। उनका यह बयान भाजपा के भीतर के डर को उजागर करता है। ममता बनर्जी की सरकार 2021 से इस योजना को लागू कर रही है, जिसमें महिलाओं को हर महीने नकद सहायता मिलती है। एससी और एसटी समुदाय की महिलाओं को 1200 रुपये और अन्य महिलाओं को 1000 रुपये दिए जाते हैं। इसका प्रभाव लाड़ली बहना या मइया सम्मान योजना के समान है। इसके अलावा, बंगाल में मातृशक्ति की पूजा की जाती है, जिसमें भाजपा अक्सर कमजोर पड़ जाती है। ममता सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिससे भाजपा चिंतित है कि महिलाएं जाति और धर्म से ऊपर उठकर ममता की पार्टी को वोट दे सकती हैं।