बिहार में कांग्रेस की वोटर अधिकार यात्रा में दक्षिण भारतीय नेताओं की भागीदारी

कांग्रेस की रणनीति पर सवाल
बिहार में राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा में बुधवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भाग लिया। इससे पहले मंगलवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी इस यात्रा में शामिल हुए थे। कर्नाटक के उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी विशेष विमान से बिहार का दौरा किया। अब यह जानना जरूरी है कि कांग्रेस इन दक्षिण भारतीय नेताओं को बिहार में लाकर क्या हासिल करना चाहती है। क्या इन नेताओं की उपस्थिति से बिहार में कांग्रेस के वोटों में इजाफा होगा? इस पर संदेह है। दरअसल, स्टालिन और रेवंत रेड्डी की वजह से कांग्रेस पर हमले तेज हो गए हैं। सवाल उठ रहा है कि स्टालिन की सरकार में तमिलनाडु में हिंदी भाषियों पर हमले हुए हैं। स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि ने सनातन धर्म का विरोध किया है। वहीं, रेवंत रेड्डी ने बिहारियों के डीएनए को कमजोर बताया था। इन बयानों के चलते कांग्रेस और राजद को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है.
गठबंधन में ताकत दिखाने की कोशिश
ऐसे में, अगर कांग्रेस पार्टी इन नेताओं को वोटर अधिकार यात्रा में शामिल कर रही है, तो इसका उद्देश्य गठबंधन के भीतर अपनी ताकत को प्रदर्शित करना हो सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि बिहार में गठबंधन के भीतर अभी भी कई मुद्दे अनसुलझे हैं। कांग्रेस और राजद के बीच सीट बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है, और कांग्रेस ने अभी तक तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित नहीं किया है, जिससे राजद में असंतोष बढ़ रहा है। दोनों पार्टियां अधिक से अधिक सीटों के लिए दबाव बना रही हैं। विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश सहनी और सीपीआई माले भी अधिक सीटों की मांग कर रहे हैं। इस राजनीतिक खींचतान में कांग्रेस अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रही है ताकि वह अधिक सीटों के लिए मोलभाव कर सके। बड़े नेताओं को बुलाकर कांग्रेस यह संदेश दे रही है कि वह पिछलग्गू पार्टी की तरह चुनाव नहीं लड़ेगी.