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बिहार में नई सरकार का गठन: मंत्रियों की शपथ और राजनीतिक समीकरण

बिहार में नई सरकार का गठन हो चुका है, जिसमें मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों की शपथ के 22 दिन बाद बाकी मंत्रियों ने भी शपथ ली। इस समारोह में प्रमुख नेताओं की उपस्थिति रही और छोटी पार्टियों को भी मंत्री पद दिए गए। नीतीश कुमार की पार्टी ने अपने पारंपरिक वोट आधार को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों का चयन किया। जानें इस नई सरकार के गठन और राजनीतिक समीकरण के बारे में अधिक जानकारी।
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बिहार में नई सरकार का गठन: मंत्रियों की शपथ और राजनीतिक समीकरण

बिहार में नई सरकार का गठन

बिहार में नई सरकार का गठन हो चुका है। मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों की शपथ लेने के 22 दिन बाद, बाकी मंत्रियों ने भी शपथ ली। इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी के अन्य प्रमुख नेताओं की उपस्थिति रही। भाजपा, जदयू और अन्य सहयोगी दलों के प्रति सद्भावना का प्रदर्शन किया गया। छोटी पार्टियों को भी उनकी संख्या के अनुसार मंत्री पद दिए गए। जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटों को मंत्री बनाया, जबकि चिराग पासवान के भी दो मंत्री बने। लेकिन असली कहानी भाजपा और जदयू की है, जिन्होंने अपने कोर वोट आधार को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों का चयन किया।


नीतीश कुमार की पार्टी का वोट आधार

जनता दल यू का वोट आधार नीतीश कुमार के प्रारंभिक दिनों से ही कोईरी, कुर्मी, धानुक और अति पिछड़ा वर्ग के साथ दलित वोट पर निर्भर रहा है। इसलिए, नीतीश की पार्टी से जिन 13 मंत्रियों ने सात मई को शपथ ली, उनमें दो कुर्मी, दो धानुक, एक कोईरी, एक गंगोता और तीन दलित शामिल हैं। पहले भाजपा कोटे से सुरेंद्र मेहता मंत्री थे, जो धानुक समाज से आते हैं, लेकिन उन्हें इस बार मंत्रिमंडल में नहीं लिया गया। नीतीश की पार्टी ने जमां खां को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया। दूसरी ओर, भाजपा ने अपने कोटे से 15 मंत्रियों को शपथ दिलाई, जिनमें छह सवर्ण मंत्री हैं। भाजपा ने बिहार के कायस्थ नेता नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है।