बिहार में भाजपा का अगला मुख्यमंत्री: संभावनाएं और चुनौतियां
भाजपा का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?
नीतीश कुमार के साथ मोदी और शाह का प्रतिशोध पूरा हो चुका है, लेकिन अब सवाल यह है कि भाजपा किसे मुख्यमंत्री बनाएगी। पिछले एक दशक में भाजपा ने जिन व्यक्तियों को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया है, उससे यह स्पष्ट होता है कि उनका उद्देश्य लोगों को चौंकाना होता है। वे हमेशा ऐसे व्यक्तियों को चुनते हैं जिनके नाम की किसी ने कल्पना भी नहीं की होती। पहले से चल रहे नामों को छोड़कर किसी और को सीएम बनाया जाता है। भजनलाल शर्मा से लेकर मोहन यादव, मोहन चरण मांझी और रेखा गुप्ता तक इसके कई उदाहरण हैं। लेकिन क्या बिहार में भाजपा इसी तरह का प्रयोग कर पाएगी?
बिहार की राजनीतिक स्थिति
यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण प्रतीत होता है क्योंकि भाजपा को बिहार में अकेले बहुमत नहीं मिला है। इसके अलावा, नीतीश की पार्टी के बिना भाजपा का पूर्ण बहुमत नहीं बनता। राजद एक मजबूत क्षेत्रीय पार्टी है, जो इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए तैयार है। इसलिए भाजपा को जातीय समीकरण का ध्यान रखना होगा और नीतीश की पार्टी की पसंद का भी ख्याल रखना होगा। इसके साथ ही, भाजपा को ऐसे नेता को चुनना होगा जो राजद का सामना कर सके और गैर यादव पिछड़ी जातियों का प्रतिनिधित्व करता हो।
भाजपा की रणनीति
इस बार भाजपा और जदयू ने खुलकर गैर यादव राजनीति की है। यादव नेताओं की टिकट काटकर उनकी जगह दूसरी मझोली जातियों, खासकर कोईरी, कुर्मी और धानुक को आगे बढ़ाया गया है। इन जातियों के अधिक विधायक विधानसभा में पहुंचे हैं। इसके अलावा, बिहार भाजपा के प्रमुख यादव नेता नंदकिशोर यादव को नगालैंड का राज्यपाल बनाया गया है, जिससे यादव सीएम का प्रयोग शायद नहीं होगा। भाजपा के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प मौजूदा फॉर्मेशन को बनाए रखना होगा।
उप मुख्यमंत्री की संभावनाएं
इस संदर्भ में, उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक संभावित पसंद हो सकते हैं। वर्तमान में जनता दल यू के मुख्यमंत्री के साथ भाजपा के दो उप मुख्यमंत्री हैं। भाजपा के मुख्यमंत्री के साथ जदयू के दो उप मुख्यमंत्री भी हो सकते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि अंततः नीतीश कुमार के बेटे निशांत को उप मुख्यमंत्री पद के लिए चुना जाएगा। इस प्रकार, कोईरी मुख्यमंत्री और कुर्मी उप मुख्यमंत्री भाजपा की गैर यादव पिछड़ी जाति की राजनीति में उपयुक्त होंगे।
भाजपा के प्रयोग और संभावित चेहरे
भाजपा में वैश्य या अति पिछड़ा मुख्यमंत्री के प्रयोग की चर्चा भी हो रही है। इस संदर्भ में संजीव चौरसिया, दिलीप, संजय जायसवाल, सुनील कुमार पिंटू और धर्मशिला गुप्ता के नामों पर विचार किया जा रहा है। दलित चेहरे के रूप में जनक राम का नाम भी लिया जा रहा है। हालांकि, भाजपा ने नीतीश कुमार को हटाने का प्रयोग सफलतापूर्वक पूरा किया है, लेकिन दूसरे प्रयोग के लिए उसे थोड़ा इंतजार करना होगा। एक प्रयोग के बीच में दूसरा प्रयोग नुकसानदेह हो सकता है।
