बिहार में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री का शपथ समारोह: उत्सव की कमी के पीछे की वजहें
बिहार में सत्ता परिवर्तन और भाजपा का नया मुख्यमंत्री
उत्तर भारत के कई राज्यों, विशेषकर बिहार में, राजनीतिक घटनाओं पर गहन चर्चा होती है। हाल ही में, नीतीश कुमार की मुख्यमंत्री पद से विदाई के बाद भाजपा ने अपना पहला मुख्यमंत्री नियुक्त किया। इस बदलाव के साथ ही कई सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा से पहले, भाजपा के एक बड़े समूह और आरएसएस के समर्थक पत्रकारों ने यह प्रचारित किया कि कोई पुराना नेता ही मुख्यमंत्री बनेगा। सम्राट चौधरी के नाम पर विरोध के बावजूद, जब वे मुख्यमंत्री बने, तो उनके पहले दिन से ही आलोचना का सिलसिला शुरू हो गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा ने इस ऐतिहासिक मौके पर कोई बड़ा उत्सव क्यों नहीं मनाया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शपथ समारोह में क्यों नहीं आए? भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों का पटना में जमावड़ा क्यों नहीं हुआ? गांधी मैदान में शपथ क्यों नहीं हुई? सभी मंत्रियों की शपथ एक साथ क्यों नहीं कराई गई? आदि।
वास्तव में, भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम पर पहले से विचार किया था। उन्हें पता था कि यह सिर्फ मुख्यमंत्री बनाने का मामला नहीं है, बल्कि नीतीश कुमार की विदाई का भी है। भाजपा को यह एहसास है कि 85 सीटें जीतने के बावजूद नीतीश कुमार को हटाना एक महत्वपूर्ण कदम है। इसलिए, क्या नीतीश कुमार की विदाई का जश्न मनाना चाहिए? इस पर विचार करने के बाद, भाजपा ने शपथ समारोह को एक साधारण कार्यक्रम रखने का निर्णय लिया। बिना किसी धूमधाम के, नीतीश कुमार के प्रति समर्थन जताते हुए समारोह का आयोजन किया गया।
जब स्थिति सामान्य हो जाएगी और सत्ता का हस्तांतरण पूरा हो जाएगा, तब भाजपा जश्न मनाएगी। फिलहाल, यह आवश्यक था कि बिहार में सरकार बनाने और अपने मुख्यमंत्री की नियुक्ति का कार्य पूरा किया जाए, जिसका पश्चिम बंगाल के चुनाव पर निश्चित प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार में एनडीए की जीत के बाद कहा था कि गंगा बिहार से बंगाल जाती हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि पूर्वी भारत के तीन बड़े राज्यों में भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं था। अब बिहार में मुख्यमंत्री बनने के बाद, भाजपा पश्चिम बंगाल की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहती है। इसलिए, बंगाल चुनाव से पहले अपने मुख्यमंत्री की शपथ कराना जरूरी था। सम्राट चौधरी को पहले ही बंगाल के स्टार प्रचारकों की सूची में शामिल किया गया था।
भाजपा की यह जल्दी इस कारण भी थी कि यदि बंगाल में प्रदर्शन अच्छा नहीं हुआ, तो बिहार में सत्ता हस्तांतरण में देरी हो सकती थी। चुनाव के बाद एनडीए के सभी घटक दलों के मंत्रियों की शपथ होगी, और उस समय संभवतः एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें भाजपा के शीर्ष नेता शामिल होंगे। यह कहना गलत होगा कि सम्राट चौधरी प्रधानमंत्री मोदी या अमित शाह के द्वारा चुने गए मुख्यमंत्री नहीं हैं। वास्तव में, मोदी और शाह ने पिछले पांच वर्षों में उनका कद इतना बढ़ाया कि वे बिहार के मुख्यमंत्री बनने के योग्य हो गए।
