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बिहार में भाजपा सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार जल्द, नए चेहरों की होगी एंट्री

बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा जोरों पर है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में पार्टी के नेताओं से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार से भी बातचीत की। इस बैठक के बाद यह संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा, जिसमें नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है। पिछले मंत्रिमंडल में भाजपा और जदयू के कई मंत्री थे, लेकिन अब जदयू अपने कोटे में मंत्रियों की संख्या बढ़ाने का दबाव बना रही है। इस बार कई पुराने मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जिससे राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
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बिहार में भाजपा सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार जल्द, नए चेहरों की होगी एंट्री

मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा

बिहार में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के बाद पटना में पूर्व मुख्यमंत्री और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार से भी बातचीत की है। 


इस मुलाकात के बाद यह माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल का विस्तार जल्द ही किया जाएगा। नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, जिसमें जदयू के कोटे से दो उप मुख्यमंत्री बनाए गए थे। 


पिछली सरकार में भाजपा के पास दो उप मुख्यमंत्री और 14 मंत्री थे, जबकि जदयू के पास मुख्यमंत्री सहित नौ मंत्री थे। इसके अलावा लोजपा (रामविलास) के दो और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के एक-एक मंत्री शामिल थे। जदयू अब अपने कोटे में मंत्रियों की संख्या बढ़ाने का दबाव बना रही है। 


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार की हालिया मुलाकात को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि एनडीए में मंत्रियों के बीच कोई तनाव की संभावना कम है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार में भाजपा और जदयू के नए चेहरों को शामिल किया जाएगा, जिससे कई पुराने मंत्रियों को हटाया जा सकता है। 


मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 24 अप्रैल को बहुमत साबित करेंगे। जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद मई की शुरुआत में बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना है। पिछली सरकार के संतुलन को बनाए रखते हुए भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो के बीच पदों का बंटवारा लगभग तय है। 


हालांकि इस बार कई पुराने नामों की जगह नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है। छोटे दलों में मंत्रिमंडल में चेहरा बदलने की उम्मीद कम है। ऐसे में लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की नजर मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हुई है।