बिहार में शराबबंदी कानून पर सियासी चर्चा, मंत्री ने कहा यह एक मिशन है
बिहार में जहरीली शराब से मौतों के बाद कानून की समीक्षा
पटना। बिहार के मोतिहारी जिले में जहरीली शराब के सेवन से आठ व्यक्तियों की जान चली गई है। इस घटना के बाद, राज्य में एक चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद शराब की बिक्री फिर से वैध हो जाएगी। इस बीच, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने इस मामले में महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने शराबबंदी कानून की समीक्षा करते हुए इसे केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक मिशन बताया है।
हाल ही में मोतिहारी में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों की घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है। लगभग दो साल पहले भी इसी तरह की घटना में कई लोगों की जान गई थी और कई ने अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी। नीतीश कुमार ने एक अप्रैल 2016 को बिहार में शराबबंदी कानून लागू किया था, लेकिन इसके बावजूद अवैध शराब की बिक्री जारी है। पिछले दस वर्षों में सैकड़ों लोग जहरीली शराब के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं और कई लोग अपनी आंखों की रोशनी खो चुके हैं। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया है कि शराबबंदी के बावजूद बिहार में शराब की होम डिलीवरी की जा रही है। जहरीली शराब से हुई मौतों के कारण बिहार में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। विपक्ष लगातार नीतीश सरकार की नाकामी पर सवाल उठा रहा है। इस बीच, यह भी चर्चा है कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद नए मुख्यमंत्री के शपथ लेने पर शराबबंदी कानून की समीक्षा की जाएगी। इस पर श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया कि बिहार में शराबबंदी केवल एक कानून नहीं, बल्कि एक मिशन है। चाहे नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहें या नहीं, उनकी जनहितैषी नीतियों को वापस नहीं लिया जाएगा और शराबबंदी कानून लागू रहेगा।
