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बिहार में सम्राट सरकार के पोस्टर पर विवाद, बीजेपी ने किया खंडन

बिहार में बीजेपी कार्यालय के पास 'सम्राट सरकार' के पोस्टर को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। इस पोस्टर को बीजेपी कार्यकर्ताओं ने फाड़ दिया, जबकि पार्टी ने इससे खुद को अलग कर लिया है। समर्थकों का कहना है कि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाना चाहिए। यह घटना पार्टी के भीतर गुटबाजी का संकेत देती है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके राजनीतिक प्रभाव के बारे में।
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बिहार में सम्राट सरकार के पोस्टर पर विवाद, बीजेपी ने किया खंडन

बिहार में सियासी हलचल


पटना। बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। इसी बीच, बीजेपी कार्यालय के पास एक विवादास्पद पोस्टर सामने आया है, जिसमें लिखा था 'वाल्मीकि समाज की यही पुकार, बिहार में हो सम्राट सरकार'। इस पोस्टर को लगाने वाले का नाम राजेश कुमार वाल्मीकि बताया गया है। पोस्टर लगने के बाद इसे बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा फाड़ दिया गया। बीजेपी के मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह पोस्टर किसने लगाया और पार्टी का इससे कोई संबंध नहीं है।




भाजपा के प्रदेश कार्यालय के मुख्य द्वार पर सम्राट चौधरी की एक बड़ी तस्वीर थी, जिसमें उन्हें बिहार का भविष्य और जन-जन का नेता बताया गया है। समर्थकों का कहना है कि सम्राट चौधरी ने भाजपा को मजबूती प्रदान की है और पिछड़ा-अतिपिछड़ा वर्ग को एकजुट किया है, इसलिए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिलनी चाहिए। पोस्टर में निवेदक के रूप में बाल्मीकि समाज संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और भाजपा नेता राजेश कुमार बाल्मीकि उर्फ रमैया का नाम है, जो खुद भी पोस्टर में दिख रहे हैं।


पोस्टर में लिखा है, 'बाल्मीकि समाज संघ की यही पुकार, बिहार में सम्राट की सरकार।' इसके आगे लिखा है, 'भाजपा को हमने दिया है हर संभव साथ, ठेकेदारी प्रथा आपकी सरकार में हो समाप्त।' यानी मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी की मांग के साथ-साथ उनसे यह भी अपेक्षा की जा रही है कि वे अपनी सरकार में ठेकेदारी प्रथा को समाप्त करेंगे। यह पोस्टर कई लोगों को चिंतित कर रहा है।


पार्टी आलाकमान की प्रतिक्रिया


हालांकि, पार्टी कार्यालय के बाहर लगे 'बिहार में हो सम्राट सरकार' वाले पोस्टर को सुरक्षा कर्मियों ने हटा दिया है। अब सवाल यह उठता है कि भाजपा कार्यालय पर 'सम्राट सरकार' के आशय के पोस्टर लगे और फिर हटाए गए, क्या भाजपा में 'सम्राट' के नाम पर एकता नहीं है? इन पोस्टरों का लगना और फिर तुरंत हटाया जाना पार्टी के भीतर गुटबाजी की ओर इशारा करता है। अक्सर ऐसी घटनाएँ तब होती हैं जब समर्थक अपने नेता को अगले मुख्यमंत्री के रूप में पेश करना चाहते हैं, लेकिन पार्टी आलाकमान इसे अनुशासनहीनता या समय से पहले की गई घोषणा मानता है।


मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर अंदरखाने हलचल


फिलहाल, बीजेपी ने इस पूरे मामले से खुद को अलग कर लिया है, लेकिन यह पोस्टर बिहार की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे चुका है। यह घटना संकेत देती है कि मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर अंदरखाने हलचल जारी है, भले ही आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्वीकार न किया जाए।