बीजेपी के नए अध्यक्ष नितिन नवीन की सक्रियता और चुनावी रणनीतियाँ
नई दिल्ली में नितिन नवीन का पदभार ग्रहण
नई दिल्ली: बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को अपने पद का कार्यभार संभालते ही सक्रियता दिखाना शुरू कर दिया है। पहले दिन ही उन्होंने केरल विधानसभा चुनाव और स्थानीय निकाय चुनावों के लिए पार्टी के प्रभारी नियुक्त किए। इसके साथ ही, उन्होंने राज्यों के वरिष्ठ नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक भी की। इस बीच, यह सवाल उठ रहा है कि क्या नितिन नवीन बिहार विधानसभा के सदस्य बने रहेंगे या उन्हें राज्यसभा में भेजा जाएगा।
चुनावों और संगठन विस्तार पर नितिन नवीन की प्राथमिकताएँ
नितिन नवीन ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के तुरंत बाद संगठनात्मक निर्णयों के माध्यम से अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट कर दी हैं। केरल विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए, पार्टी ने प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। इसके अलावा, स्थानीय निकाय चुनावों की रणनीति पर भी काम शुरू हो गया है। मंगलवार को, उन्होंने बीजेपी के प्रदेश अध्यक्षों और संगठन महामंत्रियों के साथ एक दिनभर की बैठक की, जिसमें आगामी चुनावों और संगठन विस्तार पर चर्चा की गई।
पश्चिम बंगाल पर विशेष ध्यान
नितिन नवीन के एजेंडे में पश्चिम बंगाल एक प्रमुख स्थान रखता है। बंगाल में बीजेपी को लगातार चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के खिलाफ यह लड़ाई पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में, नवीन का बंगाल दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहाँ पार्टी अपनी रणनीति और संगठन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
दोहरी जिम्मेदारी का सामना
एक बड़ा सवाल यह है कि क्या नितिन नवीन बिहार विधानसभा के बजट सत्र में भाग लेंगे। भले ही उन्होंने नीतीश कुमार सरकार से मंत्री पद छोड़ दिया हो, लेकिन वह अभी भी विधायक हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट से वह पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं। बीजेपी प्रमुख नवीन के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक की दोहरी जिम्मेदारी एक चुनौती बन सकती है। हालांकि, पार्टी उनकी आवश्यकताओं के अनुसार कार्यक्रम में बदलाव कर सकती है।
राज्यसभा में जाने का विकल्प
नितिन नवीन को राज्यसभा भेजने की संभावना भी चर्चा में है। अप्रैल में बिहार से पांच राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, जिनमें से दो बीजेपी के खाते में जाने की उम्मीद है। ऐसे में, नवीन को दिल्ली से काम करने की सुविधा मिल सकती है, जैसा पहले जेपी नड्डा के साथ हुआ था।
विधायक बने रहने की संभावना
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी फिलहाल नितिन नवीन को बिहार से अलग नहीं करना चाहती। पार्टी भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए राज्य पर नजर बनाए रखना चाहती है। नीतीश कुमार के बाद की राजनीति, जेडीयू की भूमिका और संभावित समीकरणों को देखते हुए, नवीन का बिहार में सक्रिय रहना पार्टी के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। इसी कारण उनके विधायक बने रहने की संभावना मजबूत बताई जा रही है.
